कांग्रेस पाटी के अध्यक्ष राहुल  गांधी ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस दो बार हारे हुए उम्मीदवारों पर फिर से दांव नहीं लगाएगी। साथ ही राज्यसभा के सांसद और विधायकों को भी लोकसभा चुनाव में टिकट देने से परहेज किया जाए। 

कांग्रेस महासचिवों को लोकसभा चुनाव के लिए जल्द उम्मीदवारों के चयन के निर्देश देने के बाद राहुल गांधी ने सभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों और विधायक दल के नेताओं की बैठक बुलाई है। यह बैठक शनिवार को होगी। इसी के पार्टी अध्यक्ष की कांग्रेस के सभी विभाग और संगठनों के अध्यक्ष और एआईसीसी के सचिवों की बैठक बुधवार को होगी ताकि लोकसभा चुनाव की रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सके।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देश हैं कि विधायक और राज्यसभा सांसदों को उस स्थिति में ही उम्मीदवार बनाया जाए, जब उनके अलावा किसी और प्रत्याशी का जीतना मुश्किल हो।  कांग्रेस लोकसभा चुनाव के लिए मार्च के पहले सप्ताह में उम्मीदवार घोषित करना चाहती है। इसलिए राहुल गांधी पार्टी नेताओं से चर्चा कर गठबंधन की संभावना तलाश रहे हैं।  मार्च में उम्मीदवार घोषित करने से पहले समझौते को अंतिम रूप देना होगा ताकि उम्मीदवारों के ऐलान से पहले गठबंधन की तस्वीर साफ हो सके। पार्टी उत्तर प्रदेश में भी छोटे दलों के साथ गठबंधन कर सकती है।

पार्टी का बिहार में राष्ट्रीय जनता दल, तमिलनाडु में डीएमके, महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, कर्नाटक में जेडीएस और जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेस के साथ समझौता करने की संभावना है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि गठबंधन को लेकर सभी सहयोगी दलों के साथ शुरुआती बातचीत हो चुकी है। जल्द ही सीट बंटवारे को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। पार्टी नेता मानते हैं कि बिहार, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में सहयोगी दल बड़े भाई की भूमिका निभाएगें, जबकि कर्नाटक में कांग्रेस की सीटें अधिक होंगी।