जबलपुर। रेलवे की 3 एकड़ जमीन पर कब्जा करने का एक नया मामला सामने आया है। जबलपुर रेल मंडल के इंजीनियरिंग विभाग की सीमा में आने वाली पोलीपाथर स्थित जमीन पर संजय ककवानी नामक बिल्डर ने अपनी बॉउंड्रीवॉल खड़ी कर ली। जांच करने पहुंचे रेल इंजीनियरिंग विभाग के आला अधिकारी यह देखकर चौंक गए।

आनन-फानन में संबंधित अधिकारियों से जमीन के कागज मांगवाकर जांच की गई। दोनों ही पक्ष जमीन अपनी होने का दावा कर रहे हैं। इधर रेलवे ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच बैठा दी है। इस जमीन की देखभाल करने वाले पीडब्ल्यूआई से जमीन के दस्तावेजों की जांच करने कहा गया है।
क्या है मामला

ग्वारीघाट के पोलीपाथर से लगी रेलवे की जमीन पर पहले छोटी रेल लाइन (नैरोगेज) थी। इसे हटाए जाने के बाद जबलपुर रेल मंडल ने इसके दोनों ओर बाउंड्रीवॉल बना दी। इधर बिल्डर इस जमीन से सटाकर वैशाली परिसर की प्लाटिंग कर रहा है। रेलवे का आरोप है कि बिल्डर ने नैरोगेज की अधिकांश जमीन को अपने हिस्से में ले लिया है। जिस जमीन पर बाउंड्रीवॉल है, उसका भी अधिकांश हिस्सा रेलवे की सीमा में आ रहा है। इधर बिल्डर संजय ककवानी का कहना है कि उसने अपनी जमीन में ही निर्माण किया है। इससे जुड़े दस्तावेज उसके पास हैं।
मौके पर पहुंची आरपीएफ

रेलवे की जमीन पर प्लॉटिंग करने का मामला सामने आने के बाद जबलपुर रेल मंडल से लेकर जोन और आरपीएफ तक हड़कंप मच गया है। मामले की जांच करने आरपीएफ पोलीपाथर स्थित रेलवे की जमीन का मुआयना करने पहुंची। इधर जबलपुर रेल मंडल के इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर डीईएम मामले की जांच कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि रेलवे के पास जो दस्तावेज हैं, उसमें वह जमीन रेलवे के अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन जो दस्तावेज बिल्डर ने रेलवे को दिखाए हैं, उसमें वह हिस्सा बिल्डर के क्षेत्र में आता है। बिल्डर के दस्तावेज कितने सही है, इसकी जांच शुरू हो गई है।
शिकायत आई है, जांच की जा रही है

रेलवे की जमीन पर बिल्डर द्वारा निर्माण किए जाने संबंधित शिकायत आई है। इसकी जांच सीनियर डीईएन कर रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही मैं आप को इस संबंध में स्पष्ट जानकारी दे सकूंगा।
-विजय पांडे, सीनियर डीईएन को. इंजीनियरिंग विभाग, जबलपुर रेल मंडल