भोपाल । प्रदेश सरकार द्वारा किसानों से धान खरीदी का भुगतान अभी तक नहीं किया है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड रहा है। धान खरीदी बंद हुए हुए हफ्तों बीत गए, लेकिन किसानों को भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि जस्ट इन टाइम (जेआईटी) सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण यह समस्या आई है। उधर, धान खरीदी बंद होने के बाद अब सरकार को याद आया कि इस नए सिस्टम में काम करने के लिए लोगों को प्रशिक्षण दिया जाए।खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव ने कहा है कि जेआईटी में काम करने वालों को ट्रेनिंग दी जाए। साथ ही जेआईटी से सिर्फ एक ही बार भुगतान की प्रक्रिया की जाए। भुगतान विफल होने पर उसे दोबारा प्रक्रिया में न लिया जाए। इसकी वजह ये है कि गड़बड़ सिस्टम में असफल भुगतान को दोबारा प्रक्रिया में लेने से कई किसानों को दो-दो बार भुगतान हो गया। जेआईटी सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण कई सोसायटी के किसानों को दो-दो बार भुगतान हो चुका है। इसकी वजह ई-पेमेंट प्रोसेस करने पर कई किसानों के खाते में पैसा नहीं पहुंचना सामने आया है। सॉफ्टवेयर का संचालन करने वाली एजेंसी एनआईसी ने जब असफल भुगतान को दोबारा प्रक्रिया में लिया तो संबंधित किसान के खाते में दो बार रकम पहुंच गई। अब तक लगभग पांच करोड़ रुपए की रकम किसानों से वसूलना है। 
    विभाग के संचालक श्रीमन शुक्ला ने भी इस बारे में एक पत्र जारी किया कि प्रथम बार जेआईटी से भुगतान में कोई तकनीकी दिक्कत नहीं है। फिर आगे कहा कि सुनिश्चित कर लिया जाए कि जेआईटी से भुगतान पर किसी प्रकार की तकनीकी कमी के कारण अनियमित भुगतान न हो। जाहिर है कि सरकार जबरन इस सॉफ्टवेयर को सही ठहराने पर तुली हुई है और इसी कारण किसानों को देरी से भुगतान मिल रहा है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की प्रमुख सचिव नीलम शमी राव ने सभी कलेक्टर्स को पत्र जारी कर कहा कि जेआईटी में किसानों का भुगतान किसी कारण विफल होने पर दोबारा ई-पेमेंट आर्डर जारी करने में सतर्कता बरती जाए। पहले बैंक से पता लगा लें कि किसान के खाते में पैसा पहुंच तो नहीं गया। प्रमुख सचिव राव ने कहा कि धान उपार्जन करने वाली संस्थाओं के ऑपरेटर्स एवं ई-पेमेंट पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी को विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाए। जिला सहकारी बैंकों के महाप्रबंधकों को भी मॉनीटरिंग के लिए समझाइश दी जाए। इसके अलावा किसानों को समर्थन मूल्य पर भुगतान करने से पहले सावधानी रखी जाए। खासतौर से किसान का बैंक खाता, आईएफएससी कोड, बैंक का नाम आदि मूल दस्तावेज से मिलाए जाएं, उसके बाद ही जेआईटी में एंट्री हो।