इंदौर। सांवेर तहसील के ग्राम मांगलिया में डीएलएफ को फायदा पहुंचाने के लिए क्षेत्र में २० साल से पट्टे मिलने के बाद झोपड़ी बनाकर बसे करीब २५ परिवारों को घर से बेदखल किया जा रहा है। सभी को राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत १९९८ में पट्टे दिए गए थे। प्रभावित लोग क्षेत्र के मंत्री तुलसी सिलावट और कलेक्टोरेट में जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों से भी मिले लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है। न्याय के लिए पीड़ित परिवार अम्बेडकर प्रतिमा के पास धरना देने वाले हैं। 
पीड़ितों का आरोप हैं कि शासन-प्रशासन द्वारा डीएलएफ कालोनाइजर को फायदा पहुंचाने के लिए गरीबों को घर से बेघर किया जा रहा है। आज प्रेस क्लब में आकर पीड़ितों ने पत्रकारों को अपनी दुखभरी कहानी सुनाई। पीड़ितों में बच्चे और महिलाएं भी थीं। कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि उन्हें न्याय नहीं मिला और वे बेघर हुए तो आत्मदाह तक कर सकते हैं। इसकी सारी जवाबदारी प्रशासन की होगी। 
पीड़ितों ने दूसरी जगह पट्टे के लिए ग्राम पंचायत मांगलिया (सड़क) पर आवेदन दिया तो उन्होंने लिखकर दिया कि ग्राम मांगलिया सड़क डीएलएफ काकड़े के पीछे तहसील सांवेर जिला इंदौर के लोगों द्वारा ग्राम पंचायत मांगलिया सड़क को पट्टे देने हेतु आवेदन पेश किया है चूंकि उक्त काकड़ की भूमि आवास में नहीं है इसलिए उक्त भूमि के पट्टे दिए जाना संभव नहीं है इसलिए डीएलएफ के पीछे काकड़ की भूमि को आवास में किए जाने हेतु अनुशंसा ग्राम पंचायत द्वारा की जाती है। इसके पश्चात ही लोगों को पट्टे दिए जा सकते हैं। अत: डीएलएफ के पीछे पड़े सरकारी काकड़ की भूमि को आवास में करने की कृपा करें जिससे कि लोगों को पट्टे वितरित किए जा सके।