रायपुर। जंगल सफारी के वन्यप्राणियों को अब खाने के लाले पड़ते दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि शासन द्वारा उनके खाने का बजट इस माह पास नहीं किया गया है। वहीं सफारी प्रबंधन के पास फंड नहीं है। जंगल सफारी प्रबंधन अब जानवरों को उधार का खाना खिलाने को मजबूर है। शासन से बजट की स्वीकृति न होने से सफारी प्रबंधन परेशान है। वहीं बजट के अभाव में जंगल सफारी में होने वाड़े का काम भी अधर में लटक गया है। सफारी प्रबंधन लगातार बजट के लिए शासन स्तर पर लगातार चक्कर लगा रहा है। वन विभाग के सूत्रों की मानें तो इस माह वन्यजीवों के खाने का बजट नहीं मिला है।

ज्ञात हो कि एशिया के सबसे बड़े मानव निर्मित जंगल सफारी में वन्यजीवों को रखा गया है। उनके लिए सफारी प्रबंधन द्वारा 10 बाड़ों का निर्माण कार्य पूरा कर उनमें उन्हें रखा गया है। उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें मौसम के हिसाब से खानपान की व्यवस्था जंगल सफारी प्रबंध्ान द्वारा की जाती है। उनके खानपान पर एक माह में करीब नौ से 10 लाख रुपये का खर्च आ रहा है, लेकिन शासन द्वारा बजट की स्वीकृति न दिए जाने से सफारी प्रबंधन के भी हाथ-पांव फूल गए हैं।

 

उधार का खाना खाएंगे वन्यप्राणी : सफारी प्रबंधन से मिली जानकारी के मुताबिक विभाग के पास बजट न होने की स्थिति में सफारी में वन्यप्राणियों के लिए भोजन की सप्लाई करने वाले ठेकेदार से उधार लेकर किसी तरह काम चलाया जाएगा। खाने के लिए बजट की स्वीकृति मिलने पर ठेकेदार को भुगतान किया जाएगा। इसके साथ ही सफारी प्रबंधन के पास बजट न होने से जंगल सफारी में होने वाले सभी कामों पर ब्रेक लगा दिया गया है।

बजट के अभाव में बाड़े का काम अटका : जंगल सफारी में वन्यप्राणियों के लिए 33 बाड़े का निर्माण कार्य किया जाना है। कैंपा के फंड से सफारी प्रबंधन ने 10 बाड़े का निर्माण कार्य पूरा किया था उसके बाद कैंपा के फंड पर केन्द्र से जू के लिए रोक लगा दी गई, उसके बाद से बाड़े का काम अध्ार में लटक गया है। विभाग फंड की आस देख रहा है।

 

800 एकड़ में फैला जंगल सफारी

राजधानी से करीब 25 किलोमीटर दूर नया रायपुर में 800 एकड़ में जंगल सफारी बनाई गई है। जंगल सफारी में पर्यटकों के लिए टाइगर, लायन, वाइट टाइगर, तेंदुआ, कछुआ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल, हिमालयन भालू और गोह आदि पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं। उन्हें देखने के लिए प्रदेश से ही नहीं दूसरे प्रदेश से भी पर्यटक पहुंच रहे हैं। ऐसे में बजट का अभाव होने से उन्हें भविष्य में सफर करना पड़ सकता है।