जबलपुर। पिसनहारी की मढ़िया के सामने स्थित श्री वर्णी गुरुकुल परिसर, जबलपुर में नवनिर्मित श्री दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के 20 वें तीर्थंकर मुनि सुव्रतनाथ भगवान की देश में अब तक की सबसे बड़ी प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा होने जा रही है। जयपुर राजस्थान से बनकर आई मुनि सुव्रतनाथ भगवान की श्यामवर्ण नयनाभिराम पद्मासिनी प्रतिमा सवा 11 फीट उत्तुंग है। जबकि आज से 200 साल पहले हनुमानताल क्षेत्र में स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में मुनि सुव्रतनाथ भगवान की 2.5 फीट ऊंची प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा हुई थी, जिसे उत्तरप्रदेश बांदा के श्री दिगंबर जैन मंदिर में 200 साल पहले विराजमान प्रतिमा की तरह चौथी सबसे प्राचीन प्रतिमा माना जाता है

सबसे प्राचीन प्रतिमा 9 फीट की राजस्थान के जैन मंदिर मेंविश्वप्रसिद्ध जैनतीर्थ पिसनहारी की मढ़िया के सामने स्थित श्री वर्णी गुरुकुल के ब्रह्मचारी नरेश भैया ने गजरथ-पूर्व 'नईदुनिया से विशेष-चर्चा में बताया कि मुनि सुव्रतनाथ भगवान की देशभर में सबसे प्राचीन 1800 वर्ष पूर्व स्थापित प्रतिमा राजस्थान के केशवरायपाटन क्षेत्र स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान है, जिसकी ऊंचाई 9 फीट है। यह मंदिर कोटा से 18 किलोमीटर दूर है।
जैन धर्म के 20 वें तीर्थंकर मुनि सुव्रतनाथ भगवान की दूसरी सबसे प्राचीन प्रतिमा 1500 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र के ओरंगाबाद से 12 किमी दूर पैठण के श्री दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हुई थी, जिसकी ऊंचाई 3.5 फीट है और जो अर्द्धपद्मासिनी है।
संस्कारधानी के लिए अत्यंत गौरव
यह संस्कारधानी सहित सकल जैन धर्मावालंबियों के लिए अत्यंत गौरव की बात है कि 17 से 23 फरवरी तक यही विधान एक बार फिर उपनगरीय क्षेत्र गढ़ा में देश की अब तक की सबसे बड़ी मुनि सुव्रतनाथ भगवान की प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा के सिलसिले में होने जा रहा है। मुनि सुव्रतनाथ भगवान की तीसरी सबसे प्राचीन प्रतिमा 800 वर्ष पूर्व राजस्थान नारेली ज्ञानोदय दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हुई थी, जिसकी ऊंचाई 3.5 फीट है। इस क्षेत्र में आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि सुधासागर महाराज ने अत्यधिक परिश्रम किया है।
मुनि सुव्रतनाथ भगवान की चौथी सबसे प्राचीन प्रतिमा 200 वर्ष पहले उत्तरप्रदेश के बांदा जिले में स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में स्थित है, जिसकी ऊंचाई सवा 2 फीट है। ऐतिहासिक दृष्टि से जबलपुर के हनुमानताल क्षेत्र में स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में देश की चौथी सबसे प्राचीन 2.5 फीट की प्रतिमा भी 200 साल पहले ही स्थापित की गई थी।