इन्दौर । विमानतल मार्ग स्थित श्रीश्री विद्याधाम के 24वें प्रकाशोत्सव का शुभारंभ आज सुबह गुप्त नवरात्रि के पहले दिन महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। नौ दिवसीय प्रकाशोत्सव में आज से भागवत ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ भी दोपहर में आश्रम परिसर से भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। हरिद्वार के भागवत भूषण आचार्य पं. हरिकृष्ण शास्त्री यहां 11 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2.45 से सांय 6 बजे तक कथामृत वर्षा करेंगे। दोपहर में ही आचार्य पं. राजेश शर्मा के निर्देशन में 101 वेदपाठी विद्वानों ने लक्ष्यार्चन आराधना भी की। बुधवार से यहां अग्नि स्थापन के साथ ललिताम्बा महायज्ञ का शुभारंभ होगा। 
आश्रम परिवार के पूनमचंद अग्रवाल, गोपाल मालू, राम ऐरन एवं पं. दिनेश शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर आश्रम को विशेष रूप से श्रृंगारित किया गया है। गुप्त नवरात्रि में प्रतिदिन मां ललिता पराम्बा का नित्य नूतन श्रृंगार भी होगा। भागवत कथा शुभारंभ पर जय अम्बे वरिष्ठजन मित्र मंडल की मेजबानी में आश्रम परिसर में निकली शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु महिला-पुरूष शामिल हुए। कथा शुभारंभ पर जय अम्बे वरिष्ठजन मित्र मंडल विद्याधाम की ओर से महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंदजी के सान्निध्य में व्यासपीठ का पूजन किया। इस अवसर पर हरिद्वार के भागवताचाचर्य पं. हरिकृष्ण शास्त्री ने भागवत की महत्ता बताते हुए कहा कि हम जीवन में हर क्षण जाने-अनजाने में पाप कर्म लादते चल रहे हैं। कलियुग में भक्ति ही एकमात्र उपाय है, जो इस दुर्लभ मनुष्य जीवन की यात्रा को मंजिल तक पहुंचा सकती है। जीवन में सफलता के लिए जिस तरह जोश और होंश की जरूरत होती है उसी तरह भागवत श्रवण में भी जोश के साथ होंश जरूरी है। यह ऐसा अमृत कलश है जिसकी एक बूंद भी व्यर्थ नहीं होना चाहिए। भागवत न तो ज्ञानियों का विषय है, और न ही मूर्खों का। भक्ति, भक्त, भगवान और भागवत परमात्मा से मिलने के एक-दूसरे से जुड़े हुए सेतु हैं। 
आश्रम परिवार के मंत्री पं. संजय पंडित एवं राजेंद्र महाजन के अनुसार प्रकाशोत्सव में महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सान्निध्य मंे 11 फरवरी तक भागवत ज्ञानयज्ञ, 12 फरवरी को मां पराम्बा का नौकाविहार, 13 फरवरी को शोभायात्रा, 14 फरवरी को भव्य पुष्पबंगले एवं मां के दिव्य दर्शन सहित विभिन्न आयोजन होंगे। आश्रम के संस्थापक ब्रम्हलीन स्वामी गिरिजानंद सरस्वती ‘भगवन’ के दिव्य विग्रह का प्रकटोत्सव मंगलवार 12 फरवरी को पादुका पूजन, षोडशोपचार पूजन, अभिषेक एवं आरती के साथ मनाया जाएगा। इसके पूर्व शुक्रवार 8 फरवरी को विनायक तिल चतुर्थी पर गणेश महायज्ञ एवं रविवार 10 फरवरी को बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा होगी। प्रकाशोत्सव में प्रतिदिन वैदिक संध्या, वेदपाठ, षोडशोपचार पूजन-अभिषेक, ललिताम्बा महायज्ञ, ललिता सहस्त्रनामावली द्वारा लक्ष्यार्चन आराधना एवं दुर्गा सप्तशती पाठ के अनुष्ठान भी होंगे। इस दौरान 14 फरवरी तक प्रतिदिन प्रातः 6 बजे वैदिक संध्या एवं वेदपाठ, प्रातः 7.30 बजे षोडशोपचार पूजन एवं अभिषेक, प्रातः 8.45 बजे श्रृंगार आरती, प्रातः 9.30 बजे से ललिताम्बा महायज्ञ एवं ललिता सहस्त्र नामावली से लक्षार्चन आराधना, प्रातः 10 बजे दुर्गा सप्तशती पाठ एवं सांय 7.30 बजे महाआरती के नियमित कार्यक्रम भी होंगे। आश्रम पर आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए आश्रम परिवार द्वारा विशेष प्रबंध किए गए हैं।