इन्दौर । कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जाटव की अध्यक्षता में आज आत्मा गवर्निंग बॉडी की जिला स्तरीय बैठक सम्पन्न हुई। इस अवसर पर कलेक्टर श्री जाटव ने कहा कि इंदौर जिले में करीब दस लाख आबादी गांव में रहती है। गांव के विकास से देश का विकास होगा। गाँवों में स्वरोजगार के लिये कृषकों की आय बढ़ाना जरूरी है। इसके लिये उन्हें परम्परागत खेती के अलावा कुछ अन्य कार्य करना होगा। जिले में मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, कड़कनाथ, अजोला हरी घास, शहद उत्पादन, अंकुरित मक्का से पशुओं का हरा चारा और दूध डेयरी उद्योग को बढ़ावा देना जरूरी है। गाँवों में नवाचार से किसानों का पलायन रूकेगा। वे शहरों की ओर नहीं भागेंगे। उन्होंने कहा कि इंदौर जिले में कृषि, आत्मा परियोजना, उद्यानिकी, आजीविका परियोजना, मछली पालन, पशु पालन विभाग मिलकर किसानों के रोजगार के लिये नये-नये व्यवसाय के लिये प्रशिक्षण देंगे। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत की ग्रामीण आजीविका मिशन भी इस दिशा में ठोस काम कर सकती है। उन्होंने कृषि आधारित उद्योगों में लागत बहुत कम आती है। प्रदूषण भी कम होता है और लाभ अधिक होता है। कृषि विभाग के नवाचारों के प्रचार-प्रसार की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इंदौर जिले में मुर्गी पालन, बकरी पालन और डेयरी उद्योग की व्यापक संभावनाएँ हैं।
इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती नेहा मीणा ने कहा कि जिले के किसानों का समूह बनाकर कृषि विज्ञान केन्द्र इंदौर में प्रगतिशील किसानों को व्यवसाय का प्रशिक्षण दिलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन विभाग की योजनाओं में अनुसूचित जाति और जनजाति के हितग्राहियों को विभिन्न येाजनाओं में 50 से 65 प्रतिशत तक का अनुदान भी दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिले में लघु और सीमांत कृषकों की माली हालत सुधारने की सख्त जरूरत है। इंदौर के ग्रामों में उत्पादित मशरूम को शहर के होटलों में सप्लाई किया जाये। बैठक में बताया गया कि किसानों को पॉली हाउस और सेडनेट के लिये अनुदान दिया जाता है। जिले में प्याज भंडार गृह और वेयर हाउस बड़ी संख्या में बनाये गये हैं। बैठक में कृषि यांत्रिकी विभाग द्वारा बताया गया कि जिले में किसानों को कृषि यंत्र खरीदने के लिये अनुदान दिया जाता है। इसके अलावा उन्हें रियायती दर पर ट्रेक्टर आदि किराये पर दिये जाते हैं। इंदौर जिले में 200 से अधिक तालाब हैं जहां मछली पालन भी किया जा सकता है। बैठक में कृषि, पशु पालन, आत्मा परियोजना, उद्यानिकी, मछली पालन, कृषि अभियांत्रिकी आदि विभागों के प्रतिनिधि मौजूद थे।