मौनी अमावस्या के दिन सूर्य चन्द्र की मकर राशि में युति के सानिध्य में स्नान करना महत्वपूर्ण माना गया है। ग्रह नक्षत्रम् ज्योतिष शोध संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार अनेक वर्षों बाद ऐसा शुभ अवसर आया है जब सोमवती अमावस्या पर सारे ग्रह नक्षत्र कल्याणकारी भूमिका में हैं जो मानव की हर कामना को पूर्ण करेंगे। मौनी अमावस्या का स्नान-दान इस बार विशेष पुण्यदायक रहेगा। सोमवार, 4 फरवरी के दिन अमावस्या पड़ने से इस तिथि का पुण्य प्रताप दोगुना हो गया है।
माघ मास की अमावस्या को ब्रह्मा जी और गायत्री की विशेष अर्चना के साथ-साथ देव पितृ तर्पण का विधान है। सतयुग में तपस्या को, त्रेतायुग में ज्ञान को, द्वापर में पूजन को और कलियुग में दान को उत्तम माना गया है परन्तु माघ का स्नान सभी युगों में श्रेष्ठ है। माघ मास में गोचरवश जब भगवान सूर्य, चन्द्रमा के साथ मकर राशि पर आसीन होते हैं, तो ज्योतिषशास्त्र उस काल को मौनी अमावस्या की संज्ञा देता है। ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार सूर्य की उत्तरायण गति और उसकी प्रथम अमा के रूप में मौनी अमावस्या का स्नान एक विशेष प्रकार की जीवनदायिनी शक्ति प्रदान करता है।

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके देव ऋषि और पितृ तर्पण करके यथाशक्ति तथा शेष दान कर मौन धारण करने से अनंत ऊर्जा की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में ऐसा वर्णन मिलता है कि मौनी अमावस्या के व्रत से व्यक्ति के पुत्री-दामाद की आयु बढ़ती है और पुत्री को अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सौ अश्वमेघ एवं हजार राजसूर्य यज्ञ का फल मौनी अमावस्या में त्रिवेणी संगम स्नान से मिलता है। सिविल लाइन्स एनपीए आर्केड स्थित ग्रह नक्षत्रम् की ज्योतिषाचार्य गुंजन वार्ष्णेय के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान के पश्चात तिल, तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, वस्त्र, अंजन, दर्पण, स्वर्ण तथा दूध देने वाली गौ आदि का दान किया जाता है।