नई दिल्ली । बदलती जीवनशैली के चलते हम कुदरत से मिले उपहारों का लाभ भी नहीं उठा पा रहे हैं। पर्याप्त धूप नहीं लेने की वजह से हम विटामिन डी की कमी के शिकार होते जा रहे हैं और इसकी पूर्ति के लिए दवाओं पर निर्भर हो रहे हैं। जबकि कई शोध में दावा किया गया है कि विटामिन डी सप्लीमेंट लेने का कोई फायदा नहीं है। सप्लीमेंट लेने से हड्डियों के फ्रैक्चर का खतरा भी कम नहीं हो पाता और न ही इससे शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी होती है। अगर पर्याप्त मात्रा में धूप और सही खानपान लिया जाए, तो यह कमी अपने आप ही दूर हो जाएगी। एक रिपोर्ट के अनुसार 68 फीसदी भारतीय महिलाओं में विटामिन डी की ज्यादा  कमी पाई गई हैं। सिर्फ  5.5 फीसदी भारतीय महिलाओं में ही विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता हैं और अगर दिल्ली की बात करें तो  88 फीसदी दिल्लीवासी विटामिन डी की कमी से ग्रसित हैं।  कैलिफोर्निया के टॉरो विश्वविद्यालय ने 2017 में अध्ययन में पाया था कि दुनिया में बड़ी संख्या में लोगों ने बाहर समय बिताना छोड़ दिया है। अगर वे बाहर जाते भी हैं, तो सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं। इसी वजह से विटामिन डी की कमी पाई जा रही है। 
विटामिन डी की कमी से थकान, हड्डियों में दर्द, घाव का देर से भरना, बाल झड़ना, लंबी बीमारी, मांसपेशियों में दर्द, जल्दी से बीमार पड़ जाना और तनाव होना पाया गया है। इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार इन लक्षणों को नजरअंदाज करने से  गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता हैं। जैसे  हड्डियों के बार-बार फ्रैक्चर होने की आशंका,  मोटापा बढ़ना, तनाव व अवसाद की स्थिति, अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी, कई तरह के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। 
विशेषज्ञों के अनुसार इससे बचने के लिए हर रोज कम से कम 20 मिनट धूप जरूर लें।  दूध और उससे बने उत्पाद में विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में होता है। संतरे का सेवन करें। अंडे को जर्दी के साथ खाने से विटामिन डी की कमी पूरी होती है। मशरूम खाएं। सालमोन और टूना जैसी मछलियों में कैल्शियम के साथ विटामिन डी भी काफी होता है।