हिंदू धर्म में माघ महीना बहुत पवित्र माना जाता है। इस माह में कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। पद्म पुराण में षटतिला एकादशी का बहुत महात्मय बताया गया है। इस दिन उपवास करके दान, तर्पण और विधि-विधान से पूजा करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। अपने नाम के अनुरूप यह व्रत तिलों से जुड़ा हुआ है। पूजा में इनका विशेष महत्व होता है। षटतिला एकादशी के दिन तिल का 6 तरह से प्रयोग करने पर पापों का नाश हो जाता है और बैकुंठ की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि तिल का 6 तरह से कैसे करें प्रयोग…
षटतिला यानी तिलों के छह प्रकार के प्रयोग से युक्त एकादशी। इस एकादशी के दिन तिलों का प्रयोग छह प्रकार किया जाता है। इस दिन निम्न छह प्रकार से तिलों का प्रयोग परम फलदायी माना गया है। षटतिला एकादशी के व्रत से उपासक को वाचिक, मानसिक और शारीरिक इस त्रिविधत्रय पापों से मुक्ति मिलती है।
व्रत रखने वालों के अलावा भी सभी लोगों को इस दिल तिल का छह तरीके से प्रयोग करना चाहिए। सबसे पहले तिल का प्रयोग स्नान वाले जल में करना चाहिए और इसके बाद पीले कपड़े पहनें। ऐसा करने से अभाग्य दूर होगा और भाग्य के द्वार खुलने लगेंगे।
तिल का दूसरा प्रयोग तिल का उबटन लगाकर करें और कुछ देर बैठ जाएं। ऐसा करने से सर्दी के मौसम में आपको फायदा मिलेगा। तिल का तीसरा प्रयोग पूर्व की ओर मुंह करके पांच मुट्ठी तिलों से 108 बार ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें और आहुति दें।
तिल का चौथा प्रयोग तर्पण करके करें। इसके लिए आप ब्राह्मण के साथ दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके खड़े हो जाएं और पितरों के लिए तिल से तर्पण करें। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और आपके जीवन की अनावश्यक परेशानियां और बाधाएं दूर होती हैं।
तिल का पांचवा प्रयोग दान करके करें। महाभारत में उल्लेख है कि जो भी मनुष्य माघ मास में श्रृषि-मुनि, गरीबों को तिल का दान करता है, वह कभी नरक का दर्शन नहीं करता है। माना जाता है कि माघ मास में जितने तिलों का दान करेंगे उतने हजारों साल तक स्वर्ग में रहने का अवसर प्राप्त होगा।
छठवां प्रयोग तिल से बने पदार्थों को खाना है। इसके लिए आप व्रत में अन्न का प्रयोग ना करें और शाम के समय तिल का भोजन बनाकर भगवान विष्णु का भोग लगाकर सेवन करें। इस दिन तिलयुक्त फलाहारी सामान रखना चाहिए और ब्राह्मणों को भी तिलयुक्त फलाहार खिलाना चाहिए।