वाशिंगटन । नए अध्ययन में यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं का कहना है कि शरीर की सबसे पतली रक्त-वाहिनी कोशिकाएं, जो कि छोटी धमनियों और नसों से जुड़ी होती हैं, जहरीले टॉक्सिक प्रोटीन की मौजूदगी के कारण रिसना शुरू कर देती हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इनकी मरम्मत डिमेंशिया को अल्जाइमर में तब्दील होने से रोक सकती है। स्वस्थ वयस्कों के मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं की दीवार बेहद कठोर होती है। इसके चलते कोई बाहरी अवयव मस्तिष्क के अंगों में नहीं जा पाते। यह ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ के तौर पर जानी जाती हैं। मगर बढ़ती उम्र के साथ ये रक्त वाहिकाएं इतनी सख्त नहीं रहतीं और ढीली पड़ने लगती हैं। इसके चलते अमाइलॉइड बीटा और टॉ प्रोटीन का प्रवेश मस्तिष्क में होने लगता है। ये प्रोटीन तंत्रिका कोशिकाओं को चिकना और कमजोर कर देते हैं, जो याददाश्त में कमी और असमंजस जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। कैलिफॉर्निया के कीक स्कूल ऑफ मेडिसिन में स्टेवेंस न्यूरोइमेजिंग एंड इंफॉर्मेटिव इंस्टीट्यूट से जुड़े और शोध के मुख्य लेखक डॉ. ऑर्थर टोगा के मुताबिक, अगर ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ ठीक तरह से काम नहीं करते तो तंत्रिका कोशिकाओं के नष्ट होने की संभावना ज्यादा रहती है। अध्ययन के अनुसार, रक्त वाहिकाओं में रिसाव बताता है कि ये तंत्रिका कोशिकाओं को जरूरत के मुताबिक पोषण और रक्त का प्रवाह नहीं दे पा रहीं। ऐसे में संभावना है कि मस्तिष्क में दूषित किस्म के प्रोटीन का प्रवेश हो रहा हो। इस अध्ययन में टीम ने 45 साल और इससे अधिक उम्र के 161 लोगों पर पांच साल तक अध्ययन किया। प्रतिभागियों के परीक्षण के लिए कई तरह लक्ष्य दिए गए। इनमें कुछ शब्दों और सारांश की सूची याद करना भी शामिल था। इसके जरिये याददाश्त एवं संज्ञानात्मक सोच का परीक्षण किया गया। प्रतिभागियों की प्रस्तुति के आधार पर उन्हें ‘क्लीनिकल डिमेंशिया स्कोर’ दिया गया। यह स्कोर पांच-अंकों के स्केल पर दिया गया, जो डिमेंशिया के लक्षण को बताता है। जीरो स्कोर ने ‘सामान्य’ परिणाम दर्शाए। वहीं तीन स्कोर का अर्थ था ‘गंभीर डिमेंशिया।’ इसके बाद, शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क को स्कैन किया और ‘सेरेब्रल स्पाइनल फ्लूड’ के विश्लेषण के जरिये यह मापा कि याददाश्त का संचार करने वाले दिमाग के एक हिस्से हिप्पोकैम्पस में कितनी कोशिकाएं हैं और कितना रिसाव। अपने अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह पाया कि याददाश्त परीक्षण में खराब स्तर वाले प्रतिभागियों की रक्त वाहिकाओं में सबसे ज्यादा रिसाव देखा गया। मस्तिष्क में रिसाव वाली रक्त वाहिकाएं डिमेंशिया का संकेत हो सकती हैं। हालांकि इससे पहले हुए अध्ययन में रिसने वाली रक्त वाहिकाओं की जगह मस्तिष्क में मौजूद उन जगहों पर फोकस किया गया था, जो थक्का बनाने लगते हैं।