नई दिल्ली  | विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण जेएनयू प्रशासन 22 अप्रैल को अपने स्वर्ण जयंती के मौके पर कर सकता है। पहले इसका अनावरण शनिवार को विवेकानंद की जयंती पर होना था। लेकिन तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण ऐसा नहीं हो पाएगा। मूर्तिकार नरेश बताते हैं कि प्रतिमा 200 साल तक सही सलामत रह सकती है। इसका निर्माण फाइबर के ऊपर 7 क्विंटल कांसे से की गई है। जेएनयू प्रशासनिक भवन के एक छोर पर जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा लगी है और दूसरे छोर पर स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगाई गई है। दोनों को अलग अलग मूर्तिकार ने बनाया है। पंडित नेहरू की मूर्ति तत्कालीन चांसलर कर्ण सिंह के प्रयास से वर्तमान में ऑल इंडिया फाइन आर्ट एंड क्राफ्ट सोसाइटी के अध्यक्ष पद्मश्री बिमान बी दास ने बनाई थी।.
उदयपुर में विश्व की सबसे ऊंची शिव की मूर्ति बना रहे मूर्तिकार नरेश बताते हैं कि मूर्तिकला हमें विरासत में मिली है। मेरे गुरु पिता ही हैं। उन्होंने भी कई महत्वपूर्ण प्रतिमा बनाई हैं। जब जेएनयू के पूर्व छात्र मनोज प्रतिमा बनाने का प्रस्ताव लेकर हमारे पास आए तो मन में कई भाव आए। आमतौर पर प्रतिमा में स्वामी विवेकानंद उनका हाथ बंधा हुआ दिखाया जाता है। लेकिन मेरे मन में उनका उद्बोधन था कि उठो जागो और लक्ष्य तक पहुंचने से पहले रुको मत। इसी को ध्यान में रखते हुए मैंने प्रतिमा में उनका दाहिना पैर और हाथ आगे की मुद्रा में बनाया है। जेएनयू में बनी प्रतिमा के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे दयाल सिंह कॉलेज में प्राध्यापक डॉ. मनोज कुमार बताते हैं कि इसके निर्माण में 25 लाख रुपये का खर्च आया है। इसकी लंबाई 11.5 फीट है जबकि चबूतरा 3 फीट ऊंचा है। यह नेहरू की प्रतिमा से तीन फुट ऊंची है।