भोपाल : मध्यप्रदेश के वनांचल को बेहतर सुविधाएं देने की दिशा में पूर्ववर्ती शि‍वराज सरकार की योजना को वर्तमान की कमलनाथ सरकार ने बंद कर दिया है. शिवराज सरकार ने 2016 में इस योजन की शुरूआत की थी. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दीनदयाल वनांचल सेवा का शुभारंभ किया था. चार विभागों के माध्यम से यह योजना मध्य प्रदेश के सभी ग्रामीण इलाकों में संचालित की जा रही थी, लेकिन कमलनाथ सरकार ने सत्ता में आते ही इस योजना को फंड की कमी के चलते बंद कर दिया है.

योजना के तहत वन ग्रामों तक स्वास्थ्य और शिक्षा सेवा को बेहतर ढंग से पहुंचाने की बात कही गई थी, लेकिन योजना तब सुर्खियों में आई जब पूर्व वनमंत्री गौरीशंकर शेजवार ने अपनी पत्नी को इस योजना के तहत महत्वपूर्ण जिमेदारी दी, जिसके बाद विपक्ष ने इस मामले पर हमला बोला. दीनदयाल वनांचल सेवा में जंगलों के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों और वन ग्रामों को शामिल किया गया था. इसके तहत वन विभाग, वन और वन्य प्राणियों के साथ ही वनवासियों की हेल्थ, शिक्षा और दूसरे सामाजिक कामों में हाथ बंटाएगा.

बेहतर क्रियान्वयन के लिए वन विभाग को बाकायदा ट्रेनिंग भी देने की बात कही गई थी. योजना शुरू होने पर मप्र के करीब 24 हज़ार गांवों को फायदा देने की बात कही गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

अब वन विभाग के अपर सचिव अतुल कुमार मिश्रा ने अपने पत्र में इसका कारण वित्त विभाग की योजना पर असहमति व्यक्त करना बताया है. इसकी जानकारी वन विभाग ने सभी संबंधित को दी गई. कांग्रेस ने मंत्रियो के परिजनों को लाभ पहुचाने वाली योजना करार दिया. उन्‍होंने कहा, इस योजना के जरिए वन मंत्री की पत्नी को लाभ पहुंचाया गया.