प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी के दिन शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव को समर्पित यह व्रत सब प्रकार की मनोकामनाओं को पूरा करने वाला बताया गया है। संपूर्ण शास्त्रों और अनेक प्रकार के धर्मों के आचार्यों ने इस शिवरात्रि व्रत को सबसे उत्तम बताया गया है। इस व्रत से भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह शिवरात्रि व्रत व्रतराज के नाम से विख्यात है। हो सके तो इस व्रत को जीवन पर्यन्त करें, नहीं तो चौदह साल के बाद उद्यापन कर दें। समर्थजनों को यह व्रत प्रात: काल से चतुर्दशी तिथि रहते रात्रि पर्यन्त करना चाहिए। रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करनी चाहिए।