एकादशी का व्रत सभी व्रतों में सबसे महत्वपूर्ण है। मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी का व्रत किया जाता है। इस बार यह तिथि 3 दिसंबर दिन सोमवार को है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी एक देवी है, जिनका जन्म भगवान विष्णु से हुआ था। मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को देवी एकादशी प्रकट हुई थीं इसलिए इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी हुआ। पद्मपुराण के अनुसार इस एकादशी के व्रत से धन-धान्य का लाभ और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
एकादशी का महत्व
पुराणों के अनुसार, कठिन तपस्या से आप जितना पुण्यफल प्राप्त कर सकते हैं, उतना ही पुण्यफल उत्पन्ना एकादशी का व्रत करके प्राप्त किया जा सकता है। जो भक्त सच्चे मन और साफ हृदय से इस एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
इस तरह एकादशी देवी हुईं उत्पन्न
ग्रंथों के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और मुर नामक राक्षस के बीच युद्ध हो गया था। युद्ध करते-करते भगवान विष्णु थक गए और बद्रीकाश्रम में गुफा में जाकर विश्राम करने चले गए। असुरराज मुर भगवान विष्णु का पीछा करते हुए गुफा में पहुंच गया। जब मुर ने भगवान विष्णु को निद्रा में लीन देखा तो उनको मारना चाहा। तभी भगवान विष्णु के शरीर से एक देवी प्रकट हुईं और उन्होंने मुर नामक राक्षस का अतं कर दिया।

भगवान विष्णु देवी के कार्य से बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा कि तुम मेरे शरीर से एकादशी के दिन उत्पन्न हुई हो इसलिए तुम्हारा नाम उत्पन्ना एकदाशी होगा। आज से हर एकादशी को मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा की जाएगी। सभी व्रतों में तुम सबसे महत्वपूर्ण होगी और जो भी भक्त सभी एकादशी को व्रत रखेगा, उसे बैकुंठ धाम की प्राप्ति होगी।
उत्पन्ना एकादशी व्रत विधि
नारदपुराण के अनुसार, व्रती को सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत होकर व्रत का संकल्‍प लेना चाहिए। इसके बाद घट स्थापना करें और भगवान विष्‍णु की मूर्ति या तस्वीर पर गंगाजल के छींटे देकर धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल जरूर चढ़ाएं। इसके बाद घी का दीप जलाएं और आरती करें। पूरे दिन मन ही मन भगवान का ध्यान करें। शाम में आरती पूजन के बाद फलाहार कर सकते हैं। जो लोग बीमार हैं वो दिन में भी फलाहार कर सकते हैं।  अगले दिन सुबह भगवान श्रीकृष्‍ण की पूजा करके ब्राह्मण को भोजन कराएं और फिर स्वयं व्रत का परायण करें।
उत्पन्ना एकादशी व्रत मुहूर्त
एकादशी तिथि का प्रारंभ 2 दिसंबर 2018 को 14.00 बजे से।
एकादशी व्रत की तिथि- 3 दिसंबर 2018।
एकादशी तिथि समाप्त- 3 दिसंबर 2018 को 12.59 बजे।
पारण का समय- 4 दिसंबर 2018 को 7.02 से 9.06 बजे तक रहेगा।
4 दिसंबर को पारण के दिन द्वादशी तिथि की समाप्ति 12.19 बजे होगी।

एकादशी के दिन क्या करें और क्या ना करें?
शास्त्रों का कहना है कि एकादशी के दिन सदाचार का पालन करना चाहिए और चावल नहीं खाने चाहिए। इस दिन भक्‍तों को परनिंदा छल-कपट, लालच, काम भाव, भोग विलास और द्वेष की भावनाओं से दूर रहना चाहिए। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाने के पश्चात स्वयं भोजन करें। व्रत के दौरान कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए।