नेता के बेटे, सांसद, केंद्रीय राज्यमंत्री, पीसीसी चीफ और अब इस फेहरिस्त में एक नयी पहचान - बुधनी से कांग्रेस प्रत्याशी जो सीएम शिवराज को उनके ही घर में चुनौती देने जा रहा है. कुल मिलाकर एक वाक्य में कहें तो प्रदेश की राजनीति में एक दबंग ओबीसी नेता स्व. सुभाष यादव के नरम स्वभाव बेटे.ये पहचान है कांग्रेस नेता अरुण यादव की, जिन्हें गुरुवार को पार्टी ने बुधनी विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा है.

अरुण यादव के राजनीतिक सफर पर अगर नज़र डालें तो ये बहुत पुराना नहीं है. इनकी यात्रा 2007 से शुरू हुई जब वो खंडवा से चुनकर लोकसभा पहुंचे. 2008 से 2009 तक वो लोकलेखा समिति के सदस्य रहे. यादव 2009 में दूसरी बार लोकसभा सदस्य चुने गए. 2009 में ही वो मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल में केंद्रीय राज्य मंत्री बनाए गए और उन्हें भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दी गयी. इस पद पर वो 2011 तक रहे. उसके बाद अरुण यादव को केन्द्रीय कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री बनाया गया. उसके बाद हुए फेरबदल में उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली और तब अरुण यादव प्रदेश की राजनीति में लौट आए.

यहां एक नयी पारी उनका इंतज़ार कर रही थी. यादव पर तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने युवा नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस की कमान अरुण यादव को सौंप दी. वो 14 जनवरी 2014 को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष बना दिए गए. दरअसल कांग्रेस ने प्रदेश के ओबीसी और युवा मतदाताओं को ध्यान में रखकर अरुण यादव को ये ज़िम्मेदारी सौंपी थी.

अरुण यादव का पूरा नाम अरुण सुभाषचंद्र यादव है. वो एक राजनेता होने के साथ-साथ एग्रीकल्चरिस्ट भी हैं. अरुण यादव बीकॉम पासआउट हैं. उनकी पत्नी का नाम नम्रता और एक बेटा और एक बेटी है.