अमेरिका और ईरान के बीच चली आ रही तल्खी का असर भारत समेत दूसरे तेल आयातक देशों पर क्या होगा, इसे लेकर ट्रंप प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी है. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि ईरान पर जारी यूएस के प्रतिबंध सख्ती से लागू रहेंगे. लेकिन जब सवाल भारत का आया तो पोम्पियो ने कहा कि भारत पर ईरान से तेल खरीदने की मनाही नहीं है.

हालांकि, अब तक ट्रंप प्रशासन की तरफ से यह कहा जा रहा था कि उसने चीन और भारत समेत तुर्की, इराक, इटली, जापान और दक्षिण कोरिया से कहा है कि वह जितना जल्द हो सके ईरान से तेल खरीद को पूरी तरह बंद कर दे. लेकिन भारत के अलावा चीन और जापान की यह छूट जारी रखी गई है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, इन तीनों देशों के अलावा तुर्की, ग्रीस, इटली, साउथ कोरिया और ताइवान को भी प्रतिबंध से बाहर रखा गया है.

अस्थायी छूट

हालांकि, माइक पोम्पियो ने ये भी साफ कर दिया है कि इन सभी देशों को ईरान से तेल खरीदने की यह छूट अस्थायी तौर पर दी गई है. उन्होंने कहा कि विशेष परिस्थितियों के आधार पर यह फैसला लिया गया है.

दरअसल, ईरान के खिलाफ आज (सोमवार) से अमेरिका के अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लागू हो गए हैं. अमेरिका ने ईरान के बैंकिंग और पेट्रोलियम क्षेत्र पर यह पाबंदी लागू की है, जिसके तहत ईरान से तेल खरीदने वाले यूरोप, एशिया तथा अन्य सभी देशों और कंपनियों पर भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का प्रावधान है. ट्रंप प्रशासन के इस कठोर निर्णय के बाद यह माना जा रहा था कि अमेरिका ईरान के सबसे बड़े तेल खरीदारों में शुमार भारत को लेकर भी कोई बड़ा कदम उठा सकता है.

भारत बड़ा आयातक

बता दें कि भारत और चीन, ईरान से कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं. इससे पहले माइक पोम्पियो से जब पूछा गया था कि क्या भारत और चीन ने अमेरिका को यह भरोसा दिलाया है कि छह महीने के भीतर वे ईरान से तेल खरीद पूरी तरह बंद कर देंगे तो वह इस सवाल को टाल गए थे.

डोनाल्ड ट्रंप के सख्त तेवर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मई में 2015 में हुए परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था. ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान को परमाणु मुद्दे पर फिर से बातचीत की मेज पर वापस लाना चाहता है. अमेरिकी सरकार यह भी कह चुकी है कि वह साइबर हमले, बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण, पश्चिम एशिया में आतंकी समूहों का समर्थन जैसी ईरान की 'घातक' गतिविधियों को रोकना चाहती है.