चीन ने सोमवार को ईरान के तेल एवं वित्तीय कारोबार पर अमेरिकी पाबंदी को अधिकार क्षेत्र से बढ़ कर की गयी कार्रवाई कह कर इसकी निंदा की है और ईरान के साथ द्वपिक्षीय व्यापार पूर्व की तरह जारी रखने का संकल्प जताया। 

अमेरिकी पाबंदी सोमवार को प्रभावी हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ पश्चिमी देशों के परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर चुके हैं। ट्रम्प का कहना है कि समझौते में खामी है और यह समझौता पश्चिम एशिया को अस्थिर करने के ईरान के व्यवहार पर अंकुश लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है। 

अमेरिकी की इस पाबंदी का मकसद ईरान के तेल निर्यात पर रोक लगाया और उसे अंतरराष्ट्रीय वित्त प्रणाली से अलग-थलग करना है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''चीन एकतरफा पाबंदी का विरोध करता है...। 

उन्होंने कहा, ''हमें भरोसा है कि चीन का ईरान के साथ सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है और पूरी तरह वैध है। इसका सम्मान किया जाएगा।

अमेरिका ने भारत, जापान और तुर्की समेत आठ देशों को तेल खरीदने को लेकर अस्थायी छूट दी है ताकि उनकी अर्थव्यवस्थाएं और वैश्विक बाजार प्रभावित नहीं हो। यह पूछे जाने पर कि क्या चीन को छूट मिली है, हुआ ने कहा कि हमारा ईरान के साथ सामान्य सहयोग है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के मसौदे के दायरे में है।

संयुक्त व्यापक कार्य योजना 2015 पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और रूस के साथ चीन भी शामिल है। इस समझौते से अमेरिका ने इस साल की शुरूआत में स्वयं को अलग कर लिया।

  अन्य सदस्यों का मानना है कि समझौता काम कर रहा है जिसका मकसद ईरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकना है।