नई दिल्ली । आदमखोर बाघिन अवनी के मारे जाने से नाराज भाजपा के बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट में महात्मा गांधी के कथन को इसका माध्यम बनाया है। राहुल ने लिखा, 'किसी देश की महानता का आकलन उसके द्वारा जानवरों के प्रति किए जाने वाले व्यवहार से किया जा सकता है।'
गौरतलब है कि इससे पहले रविवार को महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी आदमखोर बाघिन अवनी के मारे जाने से भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार से नाराजगी जाहिर की थी। पिछले दो सालों में 13 लोगों की मौत की जिम्मेदार अवनी के मारे जाने को उन्होंने सीधे तौर पर अपराध करार दिया है। 
महाराष्ट्र के अवतमाल में विगत शुक्रवार को अवनि को एक अभियान के दौरान मार गिराया गया था। उसे प्रसिद्ध शार्प शूटर नवाब शफत अली के बेटे असगर अली ने बोराती वन में मारा था। अवनि के दस माह के दो शावक हैं। 

अवनी के मारे जाने से नाराज मेनका ने कई ट्वीट करके रविवार को कहा कि महज कुछ लोगों के विरोध में महाराष्ट्र सरकार ने बाघिन अवनी को मारने का आदेश दे दिया। यवतमाल में उसकी निर्मम हत्या से मैं बेहद दुखी हूं। ये सीधे तौर पर अपराध है। उन्होंने कहा कि विभिन्न पक्षों की अपील के बावजूद महाराष्ट्र के वन मंत्री सुधीर मुंगंतिवार ने उसे मारने के आदेश दे दिए। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को जोरशोर से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के समक्ष उठाएंगी। उन्होंने निजी शूटर बुलाए जाने पर भी विरोध दर्ज करते हुए कहा कि वन अधिकारी बाघिन को नींद की दवा देकर उसे अपने काबू में कर सकते थे। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि हैदराबाद का शार्प शूटर शफत अली खान अब तक तीन बाघों, दस लेपर्ड, कुछ हाथियों को महाराष्ट्र के चंद्रपुर में मार चुका है। वह एक अपराधी है जो राष्ट्रविरोधी तत्वों को बंदूकों की सप्लाई करने के लिए कुख्यात है। उसके बेटे से इस गैरकानूनी काम को कराया गया है। 

महाराष्ट्र के मंत्री बोले- चाहो तो जांच करवा लो
इस बीच, मुंबई में महाराष्ट्र के वन मंत्री सुधीर मुंगंतिवार ने उधर, मेनका गांधी की आलोचना पर महाराष्ट्र के मंत्री सुधीर मुंगंतिवार ने सख्त आपत्ति जताई है। सुधीर का कहना है कि मेनका के पास 'सूचना की कमी' है और अगर वो चाहें तो इस मामले की जांच के आदेश दे सकती हैं। 

मुंगंतिवार ने अपनी सफाई में कहा कि आदमखोर बाघिन अवनी को मारा जाना आखिरी विकल्प था। इससे पहले उसे बेहोश करने की नाकाम कोशिश कई बार की गई थी। उन्होंने कहा कि वन विभाग से कोई भी उसे मारना नहीं चाहता था। इसलिए विभाग के सैकड़ों अधिकारी पिछले तीन महीने से उसे जीवित पकड़ने की कोशिश कर रहे थे।