इस्लामाबाद: पाकिस्तान की एक वरिष्ठ मंत्री ने रविवार को कहा कि ‘रक्तपात से बचने के लिए’ तुष्टिकरण की राह अपनाने से राज्येतर संगठनों के बीच खतरनाक संदेश जाता है. वरिष्ठ मंत्री का यह बयान दक्षिणपंथी इस्लामी पार्टियों और सरकार के बीच एक ईसाई महिला को ईशनिंदा के आरोप से बरी करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले पर एक समझौता होने के एक दिन बाद आया है. अपने पड़ोसी के साथ झगड़ा करने के दौरान इस्लाम का अपमान करने के आरोप में 47 वर्षीय आसिया बीबी को 2010 में सजा सुनाई गई थी.  इसके बाद पिछले सप्ताह मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार के नेतृत्व वाली उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने उनकी सजा पलट दी. 

इसके बाद से पाकिस्तान की अतिवादी धार्मिक पार्टियों और अन्य समूहों ने हिंसक विरोध प्रदर्शन किए.  ट्वीट की एक श्रृंखला में पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने कहा कि इतिहास से यह देखा जा सकता है कि तुष्टीकरण की नीति काम नहीं करती. मजारी ने कहा, ' यूरोप में ‘रक्तपात’ से बचने के लिए हुए तुष्टिकरण ने उसे द्वितीय विश्वयुद्ध के रूप में विध्वंस और बड़े पैमाने पर रक्तपात तक पहुंचा दिया. ”
सरकार और अतिवादी इस्लामी पार्टियों के बीच बनी सहमति के मुताबिक सरकार आसिया बीबी को विदेश जाने से रोकने के लिए उनका नाम ‘नो फ्लाई लिस्ट’ में डालने की प्रक्रिया शुरू करेगी.