जापान में इन दिनों ऑफिस और स्कूल में लोगों को रोने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए बाकायदा रोने की ट्रेनिंग देने के लिए टीयर्स टीचर्स भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। दरअसल, इसके पीछे की वजह है तनाव को कम करना क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि खुशी और दुख के आंसुओं से तनाव कम होता है। 

निप्पन मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर जुंको उमिहारा का कहना है कि आंसू तनाव से लड़ाई लेने में सेल्फ डिफेंस का काम करते हैं। पिछले 5 सालों से हाई स्कूल में टीचर रहे हिदेफुी योशिदा खुद को नामिदा सेंसेई (टीयर्स टीचर्स) कहते हैं और वह लोगों को रोने के फायदों के बारे में जागरुक कर रहे हैं। उनका कहना है कि डिप्रेशन कम करने में रोना, हंसने और सोने से भी ज्यादा असरदार है।

गौरतलब है कि 2014 में तोहो यूनिवर्सिटी में फैकल्टी ऑफ मेडिसिन की प्रोफेसर हिदेहो एरिता के साथ मिलकर योशिदा ने रोने के फायदों पर लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए कैंपेन लॉन्च किए गए थे। इसके बाद साल 2015 में जापान ने 50 या उससे ज्यादा कर्मचारी वाली कंपनियों के लिए स्ट्रेस चेक प्रोग्राम अनिवार्य कर दिया। पिछले कुछ वर्षों में वह सैकड़ों लेक्चर और ऐक्टिविटीज करा चुके हैं।

जापान जैसे दूसरे देशों ने हाल के कुछ वर्षों में मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना शुरू किया है जबकि 1990 तक डिप्रेशन के मुद्दे पर खुले तौर पर ज्यादा चर्चा नहीं होती थी।लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स 2016 की 8 देशों पर की गई स्टडी के अनुसार, जापान के कर्मचारी अपने एंप्लॉयर्स से डिप्रेशन से जुड़ी बात करने के मामले में बहुत पीछे हैं।

1. सेहत के लिए फायदेमंद हैं रोना 
हंसना सेहत के लिए अच्छा है लेकिन रोना भी सेहत के लिए खराब नहीं है। आंसू भी तीन प्रकार के होते हैं, रेफलेक्सिव, कंटीनिअस, इमोशनल। तीसरे तरह के आंसू सिर्फ  इंसान ही निकाल सकते हैं। इमोशनल क्राइंग बहुत ही फायदेमंद है।


2. आंखों को सुरक्षित रखते हैं आंसू 
प्याज से एक रसायन निकलता है जिससे सल्फ्यूरिक एसिड बनता है जब यह आंखों की सतह तक पहुंचता है तो  इससे छुटकारा पाने के लिए आंसू ग्रन्थियां आंसू निकालती हैं जिससे आंखों तक पहुंचा यह रसायन धुल जाता है। आंसुओं में लाइसोजाइम भी होता है जो एंटीबैक्टीरियल और एंटी वायरल होता है।