नवरात्रि व्रत में लोग बहुत से नियमों का पालन करते हैं। इस दौरान लोग मां की ज्‍योत के सामने ही जमीन पर सोते है। वहीं कुछ लोग 9 दिन तक जूते-चप्पल नहीं पहनते हैं और सिर्फ नंगे पांव चलते है। मगर क्या आप जानते हैं नवरात्रि में इस आस्था भाव के पीछे कई वैज्ञानिक पक्ष भी हैं। चलिए, आपको बताते हैं कि नवरात्र के दौरान नंगे पांव चलने से क्‍या होता है।

 

नवरात्र में नंगे पांव चलने के फायदे
1. मौसम में बदलाव है वजह
नवरात्रि से पहले बरसात का मौसम खत्म हो जाता है और सर्दियों का मौसम शुरू हो जाता है। इस समय न तो ज्यादा गर्मी होती है और न ही सर्दी इसलिए इस दौरान सूर्य की किरणों से विटामिन डी आसानी से लिया जा सकता है।

2. शरीर का तापमान होता है बैलेंस
बारिश के मौसम में शरीर का तापमान ठंडा हो जाता है लेकिन इस दौरान धरती हल्की गर्म रहती है। ऐसे में नंगे पांव चलने से शरीर की ठंडक कम होती है और तापमान सही बैलेंस में आता है। इससे सर्दी, कफ जैसी समस्याएं भी दूर हो जाती है।
 

3. एक्‍यूप्रेशर थेरेपी
नंगे पांव चलने से शरीर की एक्यूप्रेशर थेरेपी हो जाती है। दरअसल, शरीर के अंग हाथों और पैरों की नसों से जुड़े होते हैं। नंगे पांव चलते समय पैरों की नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे खून का प्रवाह तेज हो जाता है और ब्लॉकेज खत्म हो जाती है।

4. मांसपेशियां होती है सक्रिय
9 दिन बिना जूते-चप्पत के चलने से मांसपेशियां सक्रिय हो जाती है। इससे आपको मांसपेशियों में अकड़न और दर्द से भी छुटकारा मिल जाता है।
 

5. तनाव से मुक्ति
इस दौरान नंगे पांव चलने से तनाव, हाईपरटेंशन, नींद न आना, ऑर्थराइटिस, अस्थमा और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस दौरान नंगे पांव चलने से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।
 

इन लोगों को नहीं चलना चाहिए नंगे पांव
अगर आप डायबिटिक, अर्थराइटिस और पेरिफेरल वसकुलर डिजीज के शिकार है तो नंगे पैर न चलें। इससे बीमारी बढ़ने का खतरा रहता है इसलिए इस दौरान ऐसा करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।