वाशिंगटनः क्रिस्टीन ब्लेजी फोर्ड राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पद के लिए नामित ब्रेट कावानाह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों पर सीनेट की न्यायपालिका समिति के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने के लिए तैयार हो गई हैं. उनके वकील ने यह जानकारी दी. मीडिया ने मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के हवाले से शनिवार को बताया कि अनुमान के मुताबिक समिति कावानाह पर यौन उत्पीड़न के फोर्ड के आरोपों पर उनका पक्ष गुरुवार को सुनेगी. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कानावाह के नाम की पुष्टि का भविष्य काफी कुछ इस सुनवाई पर निर्भर करेगा.

पार्टी के दौरान किया था यौन उत्पीड़न
दरअसल, फोर्ड ने आरोप लगाए हैं कि 36 वर्ष पहले उपनगरीय वाशिंगटन में आयोजित एक पार्टी के दौरान कावानाह ने उनका यौन उत्पीड़न किया था. वहीं कावानाह ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह पहले दिन से ही इसपर संसद की समिति के समक्ष गवाही देने के लिए तैयार हैं. ‘द पॉलिटिको’ ने समिति और फोर्ड के वकीलों के बीच शनिवार रात हुई बातचीत की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के हवाले से बताया, ‘‘सीनेट की न्यायपालिका समिति कानावाह के खिलाफ फोर्ड के आरोपों पर उनकी गवाही गुरुवार को सुनने के लिए सहमत हुई है.’ 

गुरुवार को सुनवाई की मांग की
रिपोर्ट के अनुसार समिति में रिपब्लिकन पार्टी के नेता चक ग्रासले बुधवार को सुनवाई चाहते थे लेकिन फोर्ड ने गुरुवार को सुनवाई की मांग की क्योंकि उनके मुताबिक वह घटना के वक्त मौजूद एक व्यक्ति को गवाह के तौर पर बुलाना चाहती हैं. इससे पहले दिन में फोर्ड सीनेट की न्यायपालिका समिति के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने के लिए तैयार हो गई थीं. फोर्ड के दो वकीलों डेब्रा काट्ज और लीजा बैंक्स ने सांसद चक ग्रैसली को ईमेल किया, ‘‘डॉ फोर्ड ने ब्रेट कावानाह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों पर पूरी जानकारी देने के समिति के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है.’’ 

वाही देना चाहती हैं फोर्ड
सीनेटर ग्रैसली सीनेट की न्यायपालिका समिति के अध्यक्ष हैं. दोनों वकीलों ने गवाही का वक्त तय करने के लिए और वक्त देने की मांग की थी. व्हाइट हाउस ने इस पर कहा था कि यह देरी करने की एक चाल भी हो सकती है. व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘फोर्ड की ओर से यह जवाब हमें अब भी स्पष्ट नहीं है. वह कहती हैं कि वह गवाही देना चाहती हैं, साथ ही कहती हैं कि वह अभी भी बातचीत करना चाहती हैं. जब तक वास्तव में कोई सहमति नहीं बनती यह देर करने की एक चाल हो सकती है.’’