वॉशिंगटन: अमेरिकी मीडिया में उप अटॉर्नी जनरल से संबंधित रिपोर्ट सामने आने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिये नई चुनौती खड़ी हो गई है. रिपोर्ट में यह कहा गया है कि ट्रंप के  उप अटॉर्नी जनरल ने उन तरीकों पर चर्चा की कि किस तरह से उन्होंने ट्रंप के शासन में रहकर कुछ ही महीनों में उन्हें (ट्रम्प को) अक्षमता के आधार पर पद से हटाने के लिये काम किया. ‘न्यूयार्क टाइम्स’ और ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट ने अमेरिकी प्रशासन के लिये नयी चुनौती खड़ी कर दी है.
रिपोर्ट के अनुसार मई 2017 में रॉड रोजेन्स्टीन ने व्हाइट हाउस की गलत कार्य प्रणाली के सबूत जुटाने के लिये गोपनीय तरीके से ट्रम्प को रिकॉर्ड करने और औपचारिक तौर पर उन्हें सत्ता से हटाने में इसका इस्तेमाल करने का सुझाव दिया था.सम्मानित व्हाइट हाउस इतिहासकार बॉब वुडवर्ड के विस्फोटक किताब के सामने आने के तुरंत बाद आये इन रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ते सबूत यह संकेत देते हैं कि ट्रम्प की अपनी ही सरकार में कुछ लोग उनकी योग्यता को लेकर आशंकित हैं और उन्हें कमजोर करने के लिये वे लगातार काम कर रहे हैं. 
न्याय विभाग में दूसरे अहम अधिकारी रोजेन्स्टीन ट्रम्प के 2016 के चुनाव अभियान में रूसी दखल की जांच कर रहे हैं. बहरहाल रोजेन्स्टीन ने इन रिपोर्ट को ‘‘बेबुनियाद और तथ्यात्मक रूप से गलत’’ बताया है. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी भी राष्ट्रपति को रिकॉर्ड करने के लिये नहीं कहा और ना ही इस तरह का कोई सुझाव दिया, जिसमें मैंने राष्ट्रपति को हटाने की वकालत की हो.
यह पूरी तरह से गलत है.’’ ट्रंप के पुत्र डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने इन रिपोर्ट को शासन में विश्वासघात का सबूत बताया हैं. ये हालिया रिपोर्ट एफबीआई के तत्कालीन अंतरिम निदेशक एंड्रयू मैककैबे द्वारा लिखे उन निजी पत्र पर आधारित हैं जिसमें रोजेन्स्टीन के साथ हुई चर्चा का संक्षेप में जिक्र किया गया है.