भोपाल । मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की महत्वाकांक्षी तीर्थ दर्शन योजना पर आर्थिक संकट के बादल मंडराने लगे हैं। राज्य सरकार को योजना का करीब 80 करोड़ रुपए भुगतान करना है। कई बार तकादे के बाद अब इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) ने तीर्थ दर्शन के लिए ट्रेनों की फेरियां बंद करने की चेतावनी दे दी है। प्रदेश में यह योजना 2012 से चल रही है।

बताया जाता है कि इस संबंध में आईआरसीटी ने राज्य शासन को पत्र लिखकर लंबित भुगतान कराने का आग्रह किया है। साथ ही चेतावनी दी है कि भुगतान न होने की स्थिति में आगे तीर्थ दर्शन के लिए ट्रेन उपलब्ध नहीं हो पाएंगी। अभी दो बार आईआरसीटी ट्रेन भेजने से इंकार भी कर चुका है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भुगतान में वित्त विभाग का फरमान आड़े आ रहा है। वित्त विभाग ने आदेश जारी किया है कि सभी विभाग अपने बजट का दस फीसदी ही व्यय कर सकते हैं। इससे ज्यादा के जो भी बिल भुगतान के लिए वित्त में जाते हैं वे सभी लंबित हो जाते हैं। तीर्थ दर्शन योजना के भुगतान का मामला भी इसी बंदिश की चपेट में आ गया।

लाखों लोग कर चुके हैं तीर्थ दर्शन

प्रदेश के लाखों लोग अब तक इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। इसमें गरीबी रेखा से नीचे आने वाले बुजुर्गों को उनके जीवन काल में एक बार प्रदेश से बाहर के तीर्थ स्थानों की यात्रा निशुल्क कराए जाने की सुविधा दी जाती है। इस दौरान उन्हें खान-पान, आने-जाने और ठहरने की सुविधा मिलती है। राजस्व एवं धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग इस योजना को संचालित करता है।

ये हैं तीर्थ क्षेत्र

योजना के तहत बद्रीनाथ, केदारनाथ, जगन्नाथपुरी, द्वारका, हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णो देवी, शिरडी, तिरुपति, अजमेर शरीफ, काशी, अमृतसर, रामेश्वरम, समेद शिखर, श्रवण बेलगोला और बेलंगी चर्च नागपट्टिनम तीर्थ शामिल हैं। 2015 में तीर्थ स्थलों की सूची में अयोध्या, मथुरा, प्रयाग, गंगासागर, सेंट थामस चर्च केरल तथा संत कबीर का जन्म स्थान लहरतारा को भी शामिल कर दिया गया है।