मध्य प्रदेश में चित्रकूट इलाके से डकैतों का सफाया करने के पुलिस के दावे के बीच एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला सामने आया है जिसमें जंगल में उतरा एक एसएएफ जवान प्यासा मर गया. तीन दिन से लापता जवान की लाश देर शाम बटोही के जंगल से बरामद हुई.


दरअसल, भिंड जिले के निवासी सचिन शुक्रवार को डकैतों की सर्चिंग करते समय लापता हुआ था. और डकैत बबली कोल की तलाश में अपने साथी जवानों के साथ दस्यु प्रभावित थरपहाड़ गया था. 48 घंटे बाद गायब जवान का जंगल में शव मिला.


बताया जा रहा है कि जवान शुक्रवार की दोपहर तेज धूप में प्यास से तड़पने लगा. टीम के पास पानी खत्म हो गया, तीन जवान सचिन, शिवमोहन और अशोक सिंह की प्यास से तबियत बिगड़ने लगी. एक पेड़ के नीचे तीनों जवानों को बैठाकर टीम के सदस्य एएसआई कप्तान सिंह पानी लेने चले गए, वापस आए तो तीनों जवान गायब थे, टीम वापस बगधरा पोस्ट आ गई, प्यास से पीड़ित जवान शिवमोहन और अशोक सिंह भी वापस आ गए लेकिन एसएएफ जवान सचिन नही आया. पूछे जाने पर जवानों ने बताया सचिन उसी पेड़ के नीचे लेटा है.

अंधेरा होने के बावजूद पूरी टीम फिर उसी स्पॉट पर गई और सचिन को तलाश किया लेकिन कुछ पता नहीं लगा और टीम फिर खाली हाथ वापस आ गई. सूचना जैसे ही जिला पुलिस मुख्यालय आई तो हड़कंप मच गया. रातोंरात सतना एसपी भारी पुलिस बल के साथ बगधरा पोस्ट पहुंचे और घटनाक्रम की जानकारी लेकर जंगल की सर्चिंग शुरू कर दी.


तीन दिन की पुलिसिया सर्चिंग में जवान का कोई पता नही लगा और देर शाम चरवाहों से सूचना मिली कि बटोही के जंगल मे एक शव पड़ा. मौके पर पहुंची पुलिस ने लाश की शिनाख्त सचिन के रूप में की. आशंका है कि प्यास की वजह से जवान की मौत हुई है. पुलिस शव को अपने कब्जे में लेकर जिला मुख्यालय रवाना हो गई.


वहीं सतना में मृतक जवान का रात में ही पीएम हुआ और फिर शव को उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया. डीएसपी के नेतृत्व में पुलिस का दल गृह गांव के लिए शव लेकर रवाना हुए. पीएम के बाद आईजी डीआईजी एसपी सहित पुलिस के आला अधिकारियों ने मृत जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया और ससम्मान विदा किया.


मृतक जवान के परिजनों ने आरोप लगाया कि जवान की मौत लापरवाही की वजह से हुई है. इसकी जांच होनी चाहिए. वहीं सतना पुलिस अधीक्षक की मानें तो जवान की मौत प्यास और रास्ता भटकने की वजह से हुई है.