मध्य प्रदेश के 6 सांसद जनता के लिए आने वाली विकास कार्य की राशि खर्च करने में कंजूसी कर रहे हैं. बीजेपी हो या फिर कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के सांसद केंद्र सरकार से मिलने वाली सांसद निधी को खर्च करने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं.


प्रदेश के ऐसे सांसद जिन्होंने संसदीय क्षेत्र में विकास निधि के इस्तेमाल में अब तक दिलचस्पी नहीं ली है. उन्हें चुनावी साल में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. केंद्र सरकार द्वारा नियमों में किए गए बदलावों के कारण उन सांसदों की अगली किश्त रोक दी गई है, जो पूर्व में जारी राशि का इस्तेमाल करा पाने में नाकाम रहे. अगली किस्त तब तक जारी नहीं होगी, जब तक वे पिछले वर्षों में जारी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र और ऑडिट रिपोर्ट नहीं भेज देते


बता दें कि मध्यप्रदेश में इसी साल नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं और 15 अगस्त के बाद कभी भी आचार संहिता लागू हो जाएगी. इसके बाद प्रदेश में न तो नए विकास कार्य शुरू होंगे और न ही नए को मंजूरी मिल सकेगी. विधानसभा चुनावों के 2 माह बाद फरवरी-मार्च में लोकसभा चुनावों के लिए आचार संहिता लागू हो जाएगी. इस लिहाज से नए विकास कार्य इस अवधि में भी शुरू नहीं हो सकेंगे


सांसदों ने कितना किया खर्च



-झाबुआ सांसद कांतिलाल भूरिया ने 4 साल में मिले 12.5 करोड में से खर्च किए 1.32 करोड़

-ग्वालियर सांसद नरेंद्र सिंह तोमर ने 4 साल में मिले 12.5 करोड़ में से खर्च किए 2.57 करोड़

-बैतूल सांसद ज्योति धुर्वे ने 4 साल में मिले 10 करोड़ में से खर्च किए सिर्फ 3.79 करोड़

-भोपाल सांसद आलोक संजर ने 4 साल में मिले 10 करोड़ में से खर्च किए 4.58 करोड़

-मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने 4 साल में मिले 15 करोड़ में से खर्च किए 4.78 करोड़

-मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता ने 4 साल में मिले 15 करोड़ में से खर्च किए 4.44 करोड


न्यूज 18 ने सांसद निधी कम खर्च करने को लेकर भोपाल सांसद आलोक संजर से बातचीत की, तो उन्होंने कहा कि सांसद निधी तो एक दिन में पूरी खर्च हो सकती है...लेकिन उनका प्रयास है कि जनता की गाढ़ी कमाई से मिली सांसद निधी सही जगह पर लगे. आलोक संजर का यह बयान इस ओर भी इशारा कर रहा है कि जिन सांसदों ने राशि को सबसे ज्यादा खर्च किया है, वो शायद भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गई है.


सांसदों को संसदीय क्षेत्र विकास निधि के रूप में हर वित्तीय वर्ष में 5 करोड़ रुपए मिलते हैं, यानी 5 साल के कार्यकाल में 25 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान लगाया जा सकता है. इसका इस्तेमाल सांसद की सिफारिश पर कलेक्टर द्वारा विकास कार्यों में किया जाता है. पिछले वर्ष की दूसरी किश्त जारी हो चुकी हो. पिछले वर्ष जारी किश्त का एक अंतरिम उपयोगिता प्रमाण पत्र पेश किया जाए,जिसमें पहली किस्त का 80% खर्च होना अनिवार्य है. पिछले साल की बची हुई राशि यदि 3 करोड़ रुपए से अधिक है तो अगली किस्त जारी नहीं होगी.