ग्वालियर । पानी के लिए इतनी चिंता कि नगर निगम के भरोसे बिलकुल नहीं रहे। ऊंचाई पर घर होने के कारण नगर निगम ने पानी देने से मना कर दिया। 900 परिवारों की चिंता देख कुछ लोगों ने कमेटी बनाई और निगम को प्रस्ताव दिया। निगम की गारंटी पर एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से ऋण मिला और पानी आ गया। अब हर महीने हर परिवार पानी का बिल देता है।


जल वितरण से लेकर संधारण तक का जिम्मा लोगों ने उठाया। कमेटी ने अपने सात लोग नियुक्ति किए, जिन्हें 5-5 हजार रुपए महीने का वेतन दिया जाता है। ये टंकी भरने, मेंटेनेंस से लेकर वॉल्व खोलने व बिल जमा करने तक का काम संभालते हैं। सरकार के भरोसे न रहकर यहां के लोगों ने अपनी छोटी पीएचई (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी) बना ली है।


ऐसे किया समस्या का समाधान


कल्लू खान के मुताबिक निगम के मना करने पर लोगों ने साथ मिलकर 2007 में जल प्रदाय व संधारण कमेटी बनाई और निगम को प्रस्ताव दिया। लोन मिलने पर पहाड़ी पर सवा चार लाख लीटर की टंकी बनवाई गई। टंकी में तिघरा बांध से पानी पहुंचाया गया। 55 लाख रुपए के ऋण में 17 लाख रुपए जमा किया जा चुका है।


ऐसे बना रखी है छोटी पीएचई


- 2 लोग-टंकी भरते हैं


- 3 लोग-सप्लाई देते हैं


- 1 आदमी-बिल भरता है


- 1 आदमी-मेंटेनेंस के लिए सामान लाता है हर व्यक्ति का वेतन-5-5 हजार रुपए


इस्लामपुरा के लोग अपना पानी का बिल नियमित जमा करते हैं। लोगों ने पानी की व्यवस्था कर अच्छा काम करके दिखाया है। - जागेश श्रीवास्तव, उपायुक्त, नगर निगम