निदास ट्रॉफी के फाइनल में खेली गई 29 रनों की पारी के लिए दिनेश कार्तिक लंबे समय तक याद किए जाएंगे। कार्तिक ने हालांकि साल 2004 में ही भारतीय क्रिकेट टीम में एंट्री कर ली थी, लेकिन अभी तक कार्तिक की गिनती भारत के टॉप बल्लेबाजों में नहीं की जाती थी। इसके पीछे वजह की बात करें तो दिनेश कार्तिक को हमेशा बैकअप ऑप्शन के तौर पर इस्तेमाल किया गया। अब इसे बदकिस्मती कहें या फिर कार्तिक का बुरा प्रदर्शन, लेकिन कार्तिक इतने सालों बाद भी टीम के नियमित सदस्य नहीं बन पाए हैं। तमिलनाडु से आने वाले कार्तिक ने एमएस धोनी से पहले भारतीय क्रिकेट टीम में डेब्यू किया था। कई मौके मिलने के बावजूद कार्तिक अपने प्रदर्शन से प्रभावित करने में नाकाम रहे और आखिरकार उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। इसके बाद एमएस धोनी ने भारतीय टीम में ऐसी पक्की जगह बनायी कि दिनेश कार्तिक को काफी कम मौके मिल सके।

साल 2007 के वर्ल्ड कप के बाद एक बार फिर कार्तिक के लिए टीम में जगह बनी। दरअसल, इस दौरान राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली जैसे दिग्गजों के जाने के बाद जो जगह खाली हुई, वहां कार्तिक को कुछ मौके मिले, लेकिन इस दौरान कार्तिक अपनी इंजरी से परेशान रहे और भारतीय टीम में अपना स्थान पक्का करने से चूक गए। इस दौरान घरेलू क्रिकेट में कार्तिक का बल्ला खूब चला, फिर चाहे वो रणजी ट्रॉफी हो, या फिर दिलीप ट्रॉफी। इसके बाद आईपीएल आ गया और आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन कर रविंद्र जडेजा, आर. अश्विन जैसे कई नए खिलाड़ी टीम में शामिल हो गए और एक बार फिर कार्तिक फिर पीछे छूट गए।

आईपीएल में भी कार्तिक अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे। आईपीएल के दौरान कार्तिक पिछले 10 सीजन में 6 टीमों के साथ खेले, लेकिन कोई खास कमाल नहीं कर सके। आखिरकार, टीम से अंदर-बाहर होते रहने के बाद 32 साल की उम्र में जाकर कार्तिक को एक बार फिर से टीम में मौका मिला और इस बार निदास ट्रॉफी में उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को दिखा दिया है कि वह टीम में स्थान भले ही ना पक्का कर पाए हों, लेकिन उनमें प्रतिभा की कमी नहीं है। इस उम्र में भी कार्तिक जिस तरह से फिट लगते हैं, उससे उम्मीद की जा सकती है कि वह आने वाले 2-3 साल आराम से अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल सकते हैं। जिस तरह से भारतीय टीम को 2019 के वर्ल्ड कप के लिए मध्यक्रम में एक भरोसेमंद बल्लेबाज की जरूरत है, कार्तिक उसे बखूबी पूरा कर सकते हैं।