छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने धारा 302 के मामले में जब्त किए गए सामान के समय पर फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) रिपोर्ट पेश नहीं करने और लापरवाही के चलते मामल के आरोपी को बरी कर दिया है.


दरअसल, आरोपी ने निचली अदालत (लोअर कोर्ट) द्वारा सजा सुनाए जाने पर हाईकोर्ट में अपील की थी. इस पर हाईकोर्ट ने सचिव गृह विभाग और फोरेंसिक साइंस के डायरेक्टर को समय पर जब्त सामान के एफएसएल का सफल परीक्षण कर रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था. मामला दुर्ग जिले के बालोद में स्थित गांव का है.


आपको बता दें कि आरोपी कमलेश कुमार ने गांव में एक महिला के घर में घुसकर उसे जहर खिला दिया था, जिससे महिला की मौत हो गई थी. इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर निचली अदालत में पेश किया था. निचली अदालत ने तब आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.ॉ


इस पर आरोपी कमलेश ने हाइकोर्ट में अपील की थी, जहां हाईकोर्ट के जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल के डिवीजन बैंच ने अपील पर सुनवाई के दौरान एफएसएल रिपोर्ट समय पर पेश नहीं की होने पर लापरवाही माना और सचिव गृह विभाग और फोरेंसिक साइंस के डॉयरेक्टर को समय पर जब्त सामान का रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए आरोपी कमलेश को दिए गए निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए आरोप से बरी कर दिया है.