जबलपुर  केक बनवाने के लिए एक तो महीनेभर पहले से बुकिंग कराओ। फिर खुद का मटेरियल लाकर उसे बेक कराने के लिए घंटों बेकरी की चौखट पर इंतजार करो। ये पढ़कर अधिकांश लोग चौंकेंगे जरूर। ऐसा होना लाजिमी भी है, क्योंकि बड़े से बड़ा केक भी अब दुकानों पर रेडिमेड मिल जाता है तो फिर इतनी झंझट क्यों और किसलिए।


यदि आप ऐसा ही सोचते हैं तो हम बता दें क्रिसमस के दौरान संस्कारधानी में अंग्रेजों के जमाने की सिविल लाइन स्थित रशीद और होरी विक्टर बेकरी में ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है। खासबात यह है कि यहां सिर्फ शहर ही नहीं देश-विदेश में रहने वाले लोग भी क्रिसमस का केक बेक कराने आते हैं। मसीही समाज के लोगों का कहना है कि- लोगों का कहना है कि बिना यहां के केक के उनका क्रिसमस अधूरा है।


150 साल पुरानी बेकरी


रशीद बेकरी के संचालक फिरोज खान ने बताया कि यह बेकरी उनके दादा साहेब मरहूम सरफराज खान ने शुरू की थी। अंग्रेजों के जमाने की बेकरी है, जिसे दादा के बाद वालिद रशीद खान ने संभाला। वर्तमान में फिरोज के साथ उनकी बेगम फाइजा केक मिलकर केक बनाते हैं। इसी तरह विक्टर बेकरी के संचालक दिनेश विक्टर का भी कहना है कि उनकी बेकरी भी अंग्रेजों के जमाने की है। उनके पिता होरी विक्टर से ही उन्होंने केक बनाने का हुनर सीखा है।


ओवन नहीं भट्टी में बनता है केक


रशीद और विक्टर बेकरी में बनने वाले केक की खासियत है कि ये ओवन में नहीं बल्कि एक बड़ी सी भट्टी में लकड़ियों के अंगारे के बीच बनकर तैयार होते हैं। केक को ब्रिक्स के रूप में बेक किया जाता है। एक ब्रिक की कीमत 220 से 250 रुपए तक रहती है। दोनों ही बेकरी इसलिए भी मशहूर हैं कि यहां लोग केक बनाने के लिए अपनी तरफ से सारा मटेरियल लाते हैं और यहां आकर बेक करवाते हैं। भट्टी में बेक होने के कारण ही यहां बेक करवाने वालों की लाइन लगी रहती है। मटेरियल लाने वाले लोग क्रिसमस के दौरान 10-10 घंटे बैठ कर इंतजार करते हैं कि केक बेक हो जाए तो लेकर जाएं।


देश-विदेश से ऑडर


बेकरी से मिली जानकारी के अनुसार केक बनवाने के लिए प्रदेश के भोपाल, दमोह, सतना के साथ छत्तसीगढ़ से रायपुर, बिलासपुर से भी ऑर्डर शहर आते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं जिन लोगों के रिलेटिव मुंबई, दिल्ली यहां तक कि अमेरिका में भी रहते हैं तो वो भी क्रिसमस के लिए रशीद और विक्टर बेकरी से ही केक बनवाकर मंगवाते हैं।


पैर रखने की जगह नहीं


बेकरी से मिली जानकारी के अनुसार क्रिसमस केक के ऑर्डर मिलना शुरू हो गए हैं। 20 दिसंबर से केक लेने वालों का आना शुरू हो जाएगा। बेकरी के बाहर पैर रखने की जगह नहीं होती। हर ऑर्डर का एक टोकन दिया जाता है उसके आधार पर ही केक की पहचान होती है।


लंबे समय तक नहीं होता खराब


फिरोज खान ने बताया कि उनके यहां का बना केक कई माह तक खराब नहीं होता। इसकी वजह है भट्टी में केक का बनना और केक में डाले जाने वाले आयटमों की क्वालिटी। कैरामल(जली हुई शक्कर) को मार्केट से नहीं मंगाया जाता बल्कि बेकरी में ही तैयार किया जाता है।


रम में भिगोकर होती है तैयारी


केक में डलने वाले ड्राय फ्रूट्स, चैरी पील,मौसम्बी पील को पहले कई दिनों तक रम में भिगोया जाता है। इसके बाद उन्हें केक में डाला जाता है। क्रिसमस पर खास तौर पर रम केक, फ्रूट केक, रिबन केक बनाए जा रहे हैं। केक बनाने का तरीका पूरी तरह विदेशी पद्घति पर ही आधारित है।