जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में भर्ती में गड़बड़ी की खबरें खूब चलीं, लेकिन अब चर्चा मनचाहे भुगतान को लेकर है। विश्वविद्यालय ने 112 कर्मियों को 2013 में नियमित करने के आदेश जारी किए, लेकिन फायदा 2008 से ही मिलता रहा। यानी 5 साल पहले से वेतन, वरिष्ठता सब दी गई। इतना बड़ा फैसला विश्वविद्यालय प्रशासन ने हवा में नहीं किया। बकायदा नियम कायदों के साथ सब हुआ। कागजों में सारे कर्मचारियों की 'काल्पनिक' नियुक्ति 2008 बताई गई। इसी काल्पनिक नियुक्ति के बल पर एरियर्स और प्रमोशन भी कर्मियों ने हासिल किया। प्रशासन ने बुधवार को 438 कर्मियों के स्थायीकरण आदेश जारी कर किए तब इसका खुलासा हुआ।


क्या है काल्पनिक नियमितीकरण


विश्वविद्यालय प्रशासन ने सितम्बर 2013 में 112 कर्मचारी (20 तृतीय और 92 चतुर्थ श्रेणी) को नियमित किया। नियमितीकरण की प्रक्रिया में सभी कर्मचारियों ने 2008 से खुद को नियुक्त मानते हुए लाभ मांगा। प्रशासन की कमेटी और कानूनी कायदों की आड़ में उनकी मांग को मंजूर कर दिया गया। कहा गया कि 2008 में सभी नियमित हुए कर्मियों की काल्पनिक नियुक्ति हुई। इस आधार पर उनका वरिष्ठता क्रम भी तय किया गया। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसे तमाम कर्मियों के स्थायीकरण का आदेश करने की कार्यवाही की गई। बताया गया कि स्थापना विभाग में देर रात तक काम हुआ।


बैकलॉग कर्मियों ने किया विरोध-


पहले से नियुक्त बैकलॉग कर्मियों ने प्रशासन के इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। दो दर्जन से ज्यादा बैकलॉग कर्मियों ने कुलसचिव को दी शिकायत में कहा कि 2013 में नियमित करने के आदेश हैं इसलिए लाभ भी उसी अवधि से दिया जाए। प्रशासन 2008 से लाभ देकर बैकलॉग कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय कर रहा है। कर्मचारी इस मामले में कोर्ट की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं।


4-8 साल से था स्थायीकरण का इंतजार-


विश्वविद्यालय ने 438 तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को स्थायीकरण का आदेश जारी किया। कुलसचिव डॉ.बी भारती ने कहा कि 4 से 8 साल पहले नियमित हुए कर्मचारियों के स्थायीकरण आदेश जारी नहीं हुए, कर्मचारी इस वजह से परेशान थे। उन्हें राहत दी है। उन्होंने कर्मचारियों की जायज मांग को पूरा करने का भरोसा दिया।


सीधी बात


- 112 कर्मियों का नियमितीकरण आदेश 2013 में हुआ ?


जवाब- हॉ, नियमितीकरण किया गया। मेरे कार्यकाल में नहीं हुआ।


- क्या 112 कर्मियों को 2008 से वेतन और लाभ दिए गए ?


जवाब- पूर्व में विभिन्न कमेटी और कोर्ट की अनुशंसा के आधार पर हुआ। वेतन और वरिष्ठता सूची में उनका नाम 2008 से ही दर्ज है।


- अब उनका स्थायीकरण नियम में है?


जवाब- नियमितीकरण पूर्व में हुआ। अब महज स्थायीकरण का आदेश निकाला जा रहा। हम कागजों के आधार पर कार्य कर रहे हैं।


-डॉ.बी भारती, कुलसचिव, आरडीयू