इंदौर। बच्ची के साथ ज्यादती का आरोपी साधु अवधेशदास जोशी असली पहचान छुपाकर खत्रीखेड़ी में रणछोड़दास आश्रम में रह रहा था। वह जन्म से ईसाई है। उसके दादा अंग्रेजी सेना (महू एरिया) में नायब सूबेदार थे। तब उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था। वे प्रकाश से शिलांग प्रकाश बन गए।

 

साधु महू में एक दुर्घटना के मामले में आरोपी भी रह चुका है। वह घटना के बाद साधु बनकर अलग-अलग प्रदेशों के अखाड़ों में घूमता रहा। पुलिस को उसने अपनी पहचान छुपाकर गुमराह किया। फिलहाल वह जेल में है।

 

आरोपी अवधेशदास ने बताया था कि वह ब्राह्मण है। गोत्र वैष्णव और सरनेम जोशी लिखता है। जबकि उसका असली नाम अखिलेश प्रकाश उर्फ चिंटू पिता इजिकेल प्रकाश है। उसने कनाड़िया पुलिस को असली पहचान छुपाकर गुमराह किया। अपना नाम और पता भी गलत लिखवाया। उसने कहा था कि वह जबलपुर का रहने वाला है जबकि वह कोदरिया (महू) का मूल निवासी है।

 

पुलिस ने जबलपुर, गुजरात और उन अखाड़ों के थानों से संपर्क किया है जहां वह दस सालों से ठहरा था। टीआई एमएल चौहान ने बताया कि उन्होंने आश्रम में छापा मारकर कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं, जिसमें आरोपी का वोटर आईडी, आधार कार्ड के अलावा कोदरिया ग्राम पंचायत से बना चरित्र प्रमाण पत्र मिला है। साधु को दोबारा पूछताछ के लिए प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार करेंगे। गुमराह करने के मामले में उस पर कार्रवाई भी हो सकती है।

 

साधु का दादा चर्च का फाउंडर मेंबर

 

आरोपी साधु के दादा शिलांग अंग्रेज सेना में नायब सूबेदार था। वहां अंग्रेज अधिकारी बिल्डर अपना बंगला चर्च लगाने के लिए देता था। अंग्रेजी शासन काल हटा और बिल्डर ने महू छोड़ने के दौरान शिलांग को अपना बंगला चर्च के लिए दे दिया। शिलांग उस बिल्डर चर्च के फाउंडर मेंबर बन गए। साधु के माता-पिता की मौत हो चुकी है। पिता इजिकेल मिलिटरी इंजीनियरिंग सर्विसेस में नौकरी करते थे। बड़े भाई का नाम आशीष है, जबकि छोटा भाई महू मंे क्रिकेट प्रशिक्षक है।

 

दुर्घटना के बाद महू से भागा

 

सूत्रों के मुताबिक आरोपी नशे का आदी था। जब उसकी मां की मौत हुई तब भी वह होश में नहीं था। वह महू के बड़गोंदा थाना क्षेत्र में कमल भट्ट की बाइक से एक युवक को टक्कर मारकर भाग निकला था। वह तो पेश नहीं हुआ लेकिन उसकी जमानत गोवर्धन कैलोत ने ली। घटना के बाद से वह पहचान छुपाकर अवधेशदास बन गया और साधु बनकर नर्मदा परिक्रमा करते हुए खंडवा, ओंकारेश्वर, महेश्वर, नासिक और गुजरात के घाटों पर घूमता रहा।

 

ग्रामीण आक्रोशित, नहीं रहने देंगे गांव में

 

खत्रीखेड़ी और बेगमखेड़ी गांव के रहवासी साधु से आक्रोशित हैं। उन्होंने फैसला लिया कि वह ऐसे साधु को गांव में जगह नहीं देंगे जहां उनकी बेटी महफूज न हो। उसने साधु के नाम को कलंकित किया। आश्रम के ट्रस्ट से मिलकर यह बात रखेंगे कि वह दोबारा गांव में न आए। मंदिर जैसी धार्मिक जगह घिनौनी हरकत करना और अपनी पहचान छुपाकर रहना जनता को धोखा देना है। अभी तक बच्ची के पिता का पुलिस से संपर्क नहीं हुआ है।

 

पीड़िता ने पुलिस को बयान दिया कि पिता ने साधु से सात हजार स्र्पए लिए थे। साधु को स्र्पए देने के लिए स्कूल के दोस्त चंदा इकट्ठा कर रहे थे। बच्ची और उसके भाई-बहन अभी तक आश्रम में हैं। मां तो बच्चों से मिलने आई थी लेकिन पिता से पुलिस का संपर्क नहीं हो पाया है। पुलिस को आशंका है कि कहीं पिता ने रुपयों की खातिर बच्चों को आरोपी को सौंप तो नहीं दिया।