मेरठ । इंतजार की घडिय़ां खत्म हो गई। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार और उनकी बचपन की दोस्त नूपुर एक दूजे के हो गए। सुबह ही भुवी की बारात उनके गंगानगर स्थित आवास से निकली। शेरवानी पहने भुवी दूल्हे के लिबास में काफी फब रहे थे।

इकलौते बेटे को परिणय सूत्र में बांधने निकले पिता किरणपाल और उनकी मां का भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। माता-पिता, बड़ी बहन रेखा और परिजन गाजे-बाजे के साथ घर से ठुमके लगाते हुए कालोनी के शिवमंदिर तक पहुंचे और वहां पूजा-पाठ किया। इसके बाद भुवी कार से दिल्ली-देहरादून हाईवे स्थित होटल ब्रावुरा पहुंचे। यहां उनके स्वागत के लिए पहले से ही नूपुर का परिवार खड़ा था। 

 

भुवी-नुपूर का वैवाहिक कार्यक्रम दिन में ही रखा गया है। बारातियों के स्वागत आदि के बाद वैवाहिक कार्यक्रम शुरू हो गया है। होटल में ही बने मंडप में भुवी और नूपुर सात फेरे भी लेंगे। दोपहर दो बजे तक विवाह की सभी रस्में पूरी कर ली जाएंगी। इसके बाद परिवार के लोगों के लिए लंच रखा गया है। होटल में ही शाम चार बजे विदाई की रस्म पूरी की जाएगी। इसके बाद यहीं पर दोनों परिवार कुछ देर आराम करेगा।

 

मेरठ के चुनिंदा परिजनों-मित्रों और प्रतिष्ठित लोगों के लिए भुवी के पिता किरणपाल की ओर से रिसेप्शन का कार्यक्रम रखा गया है। रात आठ बजे से रिसेप्शन में भुवी-नूपुर पहुंचेंगे।   

 

मेरठ में भारतीय क्रिकेट टीम के स्विंग मास्टर भुवनेश्वर कुमार के घर पर उनके सभी रिश्तेदारों तथा मित्रों की मौजूदगी में घुड़चढ़ी की रस्म हो गई। इस मौके पर भुवनेश्वर कुमार के पिता व माता के साथ ही अन्य सभी लोग जमकर झूमे।  क्रिकेटर शिखर धवन के शब्दों में कहें तो 'हमारा एक शेर आज जोरू का गुलाम बनने जा रहा है'। अगर भुवी के दिल की कहें तो तीन अक्टूबर को दुनिया के सामने उन्होंने अपनी जिन 'बेटर हाफ' का चेहरा दिखाया था, आज पूरी तरह से उनके ही होने जा रहे हैं। कल शाम गढ़ आयोजित भात, मेहंदी और महिला संगीत कार्यक्रम में लोक गीत, पंजाबी गीत और हिंदी फिल्मी गीतों का ऐसा तड़का लगा कि परिवार अपनी-अपनी पसंदीदा धुन पर झूम उठा।

 

भुवी को याद आई पहली नजर

 

संगीत कार्यक्रम में तरह-तरह के गीत बजे लेकिन भुवी ने अपने पसंदीदा गीत डांस किया। भुवी ने फिल्म 'दिल धड़कने दो' के 'पहली बार' गीत पर नृत्य किया। इस गीत के बोल भुवी और नूपुर के बीच की आपसी शरारत को भी बयां करते हैं।

 

इस गाने के बोल 'पहली बार तुमको मैने जब देखा था, सुनलो यार कि मैंने क्या सोचा था। लगा कि तुमसे है मिलना तबाही, इस दिल को ही समझाने मैंने कहा, इस रास्ते न जाना कभी राही, ये तेरे लिए है ही नहीं'। इस गाने में दिल का जवाब ही भुवी का जवाब बन गया। जवाब में दिल ने कहा 'दिल मेरा बोल उठा, होने दो अब जो भी हो। डरना क्या भला बुरा, होने दो अब जो भी हो'।

 

भुवी के संगीत कार्यक्रम के लिए उनकी बड़ी बहन रेखा अधाना सहित परिवार की अन्य बालिकाओं व महिलाओं ने काफी दिनों पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी।

 

बुधवार के कार्यक्रम में उनकी प्रस्तुतियों में वह तैयारी दिखी भी। बुलंदशहर के पैतृक गांव से आई महिलाओं ने जहां भुवी की माता व अन्य लोगों के साथ पारंपरिक लोक गीतों पर नृत्य किया।

 

वहीं युवाओं ने पंजाबी गीत 'दिन सगना दा' पर पारंपरिक नृत्य किया। इसके बाद हाई हील्स, हम्मा-हम्मा, नशे सी चढ़ गई ओए...आदि दर्जनों गीतों पर सभी नृत्य किया।