बिलासपुर। कानन पेंडारी जू पहुंचने वाले पर्यटकों को जूकीपर ही वन्य जीवों की जानकारी देंगे। इसके लिए जू प्रबंधन उन्हें प्रशिक्षण देगा। इसकी शुरुआत नवंबर प्रथम सप्ताह में होगी। कानन पेंडारी जू में सालाना पांच लाख से अधिक पर्यटक पहुंचते हैं।
प्रतिदिन 2 से 3 हजार और अवकाश में संख्या 5 हजार तक लोग भ्रमण के लिए आते हैं। इनमें स्थानीय पर्यटकों के अलावा दूसरे जिले और प्रदेश के बाहर के भी पर्यटक होते हैं। बाहर से पहुंचने वाले पर्यटक कानन पेंडारी जू को जानन चाहते हैं। लेकिन गाइड की व्यवस्था नहीं होने के कारण पर्यटकों की जिज्ञासा शांत नहीं हो पाती।
ऐसे में वे जूकीपरों से यहां के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। वे इतने परिपक्व नहीं है कि वन्यप्राणी या जू के इतिहास को बता सकें।

कुछ जूकीपर पर्यटकों के साथ कैसे पेश आना है यह तक नहीं जानते। जू प्रबंधन इसी व्यवस्था को ठीक करना चाहता है। इसके लिए जूकीपरों को प्रशिक्षण देने की योजना बनाई है। केंद्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण के नियम में भी जूकीपरों को साल में चार प्रशिक्षण देने का प्रावधान है। इसकी शुरुआत नवंबर के प्रथम सप्ताह में होगी। इसमें वन्यप्राणी विशेषज्ञों के अलावा वन अफसर भी उन्हें परिपवक्व करेंगे। जू में गाइड रखने की योजना बनाई गई है। तकनीकी समस्या के कारण इसमें समय लग रहा है। इसमें जू के आसपास के गांव के बेरोजगार युवकों को मौका दिया जाएगा। जब तक गाइड तैनात नहीं हो जाते कानन के जूकीपर ही उनकी भूमिका निभाएंगे।

वर्तमान में लगभग 40 जूकीपर हैं। वहीं कर्मचारियों की संख्या 70 से 80 के लगभग है। कानन पेंडारी जू प्रभारी का कहना है कि जू-कीपरों को साल में चार बार प्रशिक्षण देने का नियम है। इसी का पालन करते हुए उन्हें प्रशिक्षण देने की तैयारी चल रही है। नवंबर प्रथम सप्ताह में इसे आयोजित किया जाएगा। जिसमें उन्हें वन्यप्राणियों के वैज्ञानिक नाम, किस तरह देखभाल करना है और पर्यटकों के पूछने पर उन्हें वन्यप्राणियों के बारे में विस्तार से कैसे बताना है आदि की जानकारी दी जाएगी।