तीन दशक से नक्सलवाद का दंश झेल रहे बस्तर अब शांति की ओर बढ़ा रहा है. एक तरफ माओवादियों के सफाया के लिए लगातार ऑपरेश्न चलाए जा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर सीआरपीएफ में महिला कंमाड़ो की नियुक्ति की गई है.

सीआरपीएफ की महिला कंमाडो उषा किरण माओवादियों के लिए सबसे सुरक्षित इलाका दरभा में अपनी टुकडियों के साथ नक्सलियों की तलाश कर रही है.

सीआरपीएफ की महिला कंमाडो उषा बस्तर में अपनी सेवा देने का मन बनाकर पहुंची है और मिशन 2017 के तहत दरभा को पूरी तरह नक्सलमुक्त करने का प्रण लिया है.

25 मई साल 2013 जीरम घाटी की घटना, जो बस्तर के लिए काला दिन साबित हुआ..इसी दिन माओवादियों ने दरभा इलाके में खूनी खेल खेला था. कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं के मारे जाने के साथ ही कई पुलिस जवान शहीद हो गए थे.

माओवादियों ने इस इलाके को अपना गढ़ बना लिया है और लगातार खौफनाक घटनाओं को अंजाम पहुंचा रहे हैं. समय के साथ-साथ अब दरभा भी बदल रहा है. यहां पुलिस के जवानों के साथ-साथ अब महिला कंमाड़ो ने भी मोर्चा संभाल लिया है और लगातार माओवादियों को पीछे धकेला जा रहा है.

सीआरपीएफ की महिला कंमाड़ो उषा किरण माओवादियों से लोहा लेने बस्तर पहुंची हैं. नक्सलियों से संबंधित किसी भी तरह की खबर मिलते ही हाथ में एके47 थामे अपनी टुकड़ी को लेकर निकल पड़ती है.

 

माओवादियों की तलाश करने के लिए जंगल में मीलों पैदल चलने के बाद जांबाज महिला कंमाड़ो ने बातचीत में कहा कि सीआरपीएफ में जो ट्रेनिग दी गई है हम उसी रुप में काम करते हैं. बस्तर की भगौलिक स्थितियां सब जगहों से अलग है, ऐसे में कब कहां माओवादियों से मुठभेड़ हो जाए कहा नहीं जा सकता.

साथ ही सीआरपीएफ की इस महिला अधिकारी ने यह भी कहा है कि फोर्स में यह कहना गलत होगा कि महिलाओं के लिये यहां जगह नहीं है. सबसे सुरिक्षत जगह अगर कहीं है तो वह फोर्स में ही है.

इसके अलावा महिला कंमाडो ने बातचीत में यह भी कहा है कि झीरम की घटना से बस्तर का नाम कुछ और हो गया था. लेकिन अब बस्तर बदल रहा है और माओवादियों को बस्तर छोड़कर जाना ही पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ में आना उनके लिए गर्व की बात है, उनके दादा और पिता भी सीआरपीएफ में अपनी सेवा दे चुके हैं. उन्होंने कहा कि उन्हीं से प्रेरणा लेकर सीआरपीएफ में आने का मन बनाया. साथ ही माओवादियों के साथ काम करने वाली महिलाओं को मुख्यधारा में लाना ही उनका उद्देश्य है.

उषा किरण ने बताया कि बस्तर की महिलाओं को किसी भी प्रकार का डर है तो वे उनके साथ खड़ी है. वहीं महिला कंमाडेट के साथ काम करने वाले सीआरपीएफ अधिकारी का मानना है कि उनकी टीम में महिला ऑफिसर के आने के बाद जवानों का हौसला बढ़ गया है और महिला अधिकारी के साथ कदम से कदम मिलाकर नक्सल मोर्चे में काम किया जा रहा है.