नई दिल्लीलखनऊ: समाजवादी पार्टी पर लटक रही टूट की तलवार से कांग्रेस काफी चिंतित है। कांग्रेस उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव गुट के साथ साइकिल चुनाव चिन्ह पर गठबंधन करना चाहती है।

अखिलेश यादव और कांग्रेस के बीच गठबंधन सन्निकट
कांग्रेस के रणनीतिकार समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह को लेकर चिंतित हैं। वे चाहते हैं कि अखिलेश को साइकिल चुनाव चिन्ह मिले जिसे मतदाता आसानी से पहचान सकें। अखिलेश यादव और कांग्रेस के बीच गठबंधन सन्निकट है। मगर सबकी निगाह चुनाव आयोग के साइकिल के फैसले पर टिकी हुई है। चुनाव आयोग ने साइकिल पर फैसला देने के लिए दोनों पक्षों को अब 13 जनवरी को बुलाया है।

अखिलेश यादव ने पार्टी में बगावत का झंडा उठाया
मुलायम सिंह यादव साइकिल का चुनाव चिन्ह अपने पास रखना चाहते हैं क्योंकि उन्होंने ही सपा का गठन किया था। उनके पुत्र अखिलेश यादव ने पार्टी में बगावत का झंडा उठाया है। अखिलेश को सपा विधायक दल और संगठन की कार्यकारी समितियों में भारी समर्थन प्राप्त है। एक राजनीतिक पार्टी में विवाद के मामले में चुनाव चिन्ह उसी को अलाट किया जाता है जो पार्टी में मजबूत हो। कांग्रेस के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है।

मुलायम गुट को चुनाव चिन्ह न मिले बल्कि फ्रीज हो जाए
वरिष्ठ सदस्यों की दलील है कि अगर अखिलेश गुट में नए चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ता है तो विशाल राज्य के हर कोने में उनकी नई पहचान का संदेश देना कठिन होगा। अगर यह 2 महीने पहले हो जाता तो चुनाव चिन्ह के बारे में मतदाताओं को बताने में काफी समय मिल जाता। कांग्रेस चाहती है कि मुलायम सिंह गुट को साइकिल चुनाव चिन्ह न मिले बल्कि फ्रीज हो जाए।

कांग्रेस अखिलेश की लोकप्रियता से फायदा उठाना चाहती
कांग्रेस का विश्वास है कि अखिलेश ने राज्य में काफी विकास करवाया है और उनका मतदाताओं में काफी प्रभाव है। अगर मुलायम सिंह को साइकिल चुनाव चिन्ह मिल गया तो वह अपने बेटे के जनाधार में सेंध लगा सकते हैं। कांग्रेस अखिलेश की लोकप्रियता से फायदा उठाना चाहती है। इसके साथ ही गठबंधन से वह उत्तर प्रदेश चुनावों में अपना आधार भी मजबूत करना चाहती है।