मध्य प्रदेश में पिछले दिनों स्वच्छता अभियान की सबसे 'गंदी' तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. सूबे के उज्जैन में नगर निगम के कर्मचारियों ने एक बुजुर्ग को खुले में शौच करने पर अपने हाथों से साफ करने के लिए मजबूर किया था.

अब प्रदेश के ग्वालियर अंचल से स्वच्छता अभियान से जुड़ी सबसे 'खतरनाक' खबर सुर्खियों में हैं. दरअसल, स्वच्छता अभियान के तहत ग्वालियर जिले में जिला पंचायत का अमला ग्रामीण इलाकों में लोगों को खुले में शौच न करने और शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित करने का काम कर रहा है.

इसी दौरान कुछ गांवों में लाइसेंसी बंदूकधारी सरकारी अमले को धमकाने का काम करते हैं. बताते हैं कि कोई भी सरकारी कर्मचारी यदि खुले से शौच करने से रोकता है या ऐसा नहीं करने की सलाह देता है तो ग्रामीण अपनी लाइसेंसी बंदूक लेकर धमकी देने लगते हैं.

55 लोगों की हुई पहचान

जिला पंचायत के सीईओ नीरज कुमार ने कर्मचारियों की शिकायतों के बाद 55 ऐसे लोगों की पहचान की है, जो अपने लाइसेंसी हथियारों से सरकारी अमले को धमकाते है. अब ऐसे लोगों को सबक सिखाने के लिए कड़े फैसले लिए जाने की तैयारी है.

जिला पंचायत के सीईओ ने ऐसे 55 बंदूकधारियों के लाइसेंस निरस्त करने की अनुशंसा जिला कलेक्टर से की है, जिन्होंने शौचालय बनवाने पहुंचे सरकारी अमले को धमकाने की कोशिश की.

पूर्व में भी शिकायत

जिला पंचायत की ओर से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला कलेक्टर को लिखा जा चुका है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से खुले में शौच करने वालों के हौंसले बुलंद होते जा रहे हैं. ऐसे में अब उनके लाइसेंस निरस्त करने जैसा कड़ा फैसला लिया गया है.

डिफॉल्टर पर लागू हुआ फैसला

एमपी के ग्वालियर-चंबल अंचल में बैंक से लोन लेने के बाद दबंग लोग इसे चुकाते नहीं थे. वसूली के लिए पहुंचे अमले को लाइसेंसी हथियारों के दम पर धमकाया जाता था, जिसके बाद प्रशासन ने बैंक डिफॉल्टर के लाइसेंस निरस्त करना शुरू किए थे.