भिंड में एक तरफ तो अतिक्रमण विरोधी मुहीम चलाई जा रही है। वही दूसरी ओर अतिक्रमण के नाम पर महज औपचारिकताएँ पूरी की जा रही हैं।मामला पुराने रेल्बे स्टेशन के नजदीक महीनों पहले बने हॉकर्स जोन का है, जहाँ जिला चिकित्सालय के पीछे बने हॉकर्स जोन को प्रशासन द्वारा वनवाकर तैयार तो करवाया गया परंतु आज तक प्रशासन ने वहाँ ठेले लगवाने की सुध नहीं ली। जबकि हाथ ठेले वाले व्यापारी पूरे प्रशासन को ठेंगा दिखाकर, सदर बाजार,सब्जी मंडी,जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय वाली रोड पर ठेला लगाते थे।जिससे हमेशा एक जैसी जाम की स्थिति बनी रहती है। क्योंकि आज भी सभी ठेले मैन सदर बाजार में ही लगाये जा रहे है। परन्तु देखने वाली बात यह है कि जहां प्रशासन को स्थिती सामान्य करने की जरूरत है वहाँ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि बस स्टेण्ड के नजदीक जहाँ स्थिति इतनी चिन्ताजनक नही है वहाँ ठेले वालों को वे-वजह ठेले हटाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जबकि बनाये गए हॉकर्स जोन की कोई भी सुध नहीं ली जा रही है। जिससे बनाये गए हॉकर्स जोन में घूम रहे सूअरों ने अपना अडडा जमा लिया है। तथा देखने वाली बात यह है कि आखिर प्रशासन की क्या मजबूरी है जो वह इस ओर ध्यान नही देना चाहता और मूक दर्शक बनकर बैठा हुआ है।

*कुछ सवाल यह भी जिनका जबाब जानना जरुरी है*

🔴आज दिनाँक तक हॉकर्स जॉन में कोई ठेला वाला ठेला लगाने नहीं गया,क्यों..?

🔴अगर वहाँ ठेले नही लगवाये जाने थे तो हॉकर्स जोन का निर्माण क्यों करवाया गया....?

🔴जब हाथ ठेले दूसरी जगह लगवाने का कोई विकल्प नही था तब सब्जी मंडी से ठेले हटवाने की कार्यवाही क्यों की गयी थी......?

🔴आज जब विकल्प सामने है तो फिर वहाँ ठेलों को स्थानान्तरित क्यों नही करवाया जा रहा है....?


राहुल शर्मा  भिंड