छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक गरीब और मजबूर बाप अपने बेटे के शव को लेकर घंटों भटकता रहा. एकलौते बेटे की लाश का बोझ उठाए इस बदहवास पिता की सुनने वाला कोई नहीं था.

पूरा मामला बस्तर संभाग के सुपर स्पेशलिटी कहलाने वाला महारानी अस्पताल का है. ये अस्पताल सुविधाओं के लिए कम अव्यवस्थाओं के लिए ज्यादा जाना जाता है. जिसका खमियाजा हर दिन बस्तर के गरीब आदिवासी से लेकर सभी वर्ग के लोगों को भुगतना पड़ रहा है.

लेकिन कभी-कभी महारानी अस्पताल में ऐसी तस्वीरें भी सामने आ जाती हैं, जो मानवता की हदें पार कर देती हैं.

दरअसल दंतेवाडा जिले के फुलगटटा में रहने वाले तुलाराम के पांच साल के पुत्र को मलेरिया गया था. दंतेवाडा से तुलाराम के पुत्र श्रवण को बेहतर इलाज का हवाला देते हुए जगदलपुर के महारानी अस्तपाल रेफर किया गया था.

पुत्र श्रवण को लेकर महारानी अस्पताल पहुंचे पिता को पता चला कि उसके पुत्र की मौत रास्तें में ही हो गयी है. अपने इकलौते बेटे की अकस्मात मौत के बाद पिता और मां काफी देर तक बच्चे के शव के पास बेसुध खड़े रहे. इन सबके बीच शुरू हुआ मेकाज में अव्यवस्था का आलम. जहां गरीब पिता अपने बेटे की लाश को हाथों में उठाकर घंटों भटकता रहा.

दरअसल शव को ले जानें के लिए मेकाज में मुक्ताजंलि शव वाहन की व्यवस्था की गयी है. लेकिन लंबे समय से मुक्ताजंलि वाहन के संचालकों की मनमानी के चलते ये परेशानी आए दिन खड़ी हो रही हैं. यहीं वजह है कि अपने बेटे की लाश को हाथ में लिए पिता तुलाराम काफी देर तक बदहवास और परेशान होता रहा.

इस बात की जानकारी महारानी अस्तपाल की पुलिस चौकी की हुई. चौकी पर तैनात प्रभारी एमजे सिंह ने इस बात की जानकारी बस्तर कमिश्नर को दी और करीब चार घंटे के बाद रेडक्रास की एबुलेस के जरिए शव को उसके गृहग्राम भेजा गया. गौरतलब है कि मेकाज में शव ले जानें के लिए मात्र एक ही वाहन उपलब्ध है जिसके चलते शव को ले जाने के लिए परिजन हर दिन परेशान होते हैं.