नई दिल्लीः नोटबंदी के जरिए काले धन को खत्म करने की मोदी सरकार की उम्मीदों पर एक बड़ी चोट लगी है। केंद्र सरकार के लिए यह बुरी खबर साबित हो सकती है। नोटबंदी के बाद 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बैंकों में जमा करने की समय सीमा खत्म होने यानि 30 दिसंबर 2016 तक ऐसे नोटों का अधिकांश हिस्सा बैंकों में जमा हो चुका है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है।

नोटबंदी के ऐलान के समय अर्थव्यवस्था में 500 और 1000 रु के नोटों की शक्ल में करीब 15.4 लाख करोड़ रुपए की रकम थी। सूत्रों के मुताबिक 30 दिसंबर 2016 तक इसमें से 14.97 लाख करोड़ रुपए की रकम बैंकों में वापस आ चुकी थी। शुरुआत में सरकार ने अनुमान लगाया था कि नोटबंदी के बाद टैक्स की चोरी कर जमा किए गए पांच लाख करोड़ रुपए लौटेंगे ही नहीं। उसे उम्मीद थी कि इस विशुद्ध मुनाफे का इस्तेमाल वह कल्याणकारी योजनाओं में करेगी।

लेकिन ताजा स्थिति यह है कि अमान्य हुए नोटों का करीब 97 फीसदी हिस्सा वापस बैंकों में आ चुका है। अभी 31 मार्च तक पुराने नोट रिजर्व बैंक में जमा किए जा सकते हैं। यानि यह आंकड़ा करीब 100 फीसदी तक भी जा सकता है। भाजपा पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में नोटबंदी को एक बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। लेकिन यह खबर उसे चिंता में डालने वाली है।