कालपुरुष की सिद्धांतानुसार बृहस्पति को सातवें और नवें घर का कारक माना गया है। लाल किताब के अनुसार बृहस्पति का पक्का घर चौथा है व दसवां घर विश तुल्य है। बृहस्पति कर्क राशि में उच्च और मकर में नीच का प्रभाव देते हैं।

–– ADVERTISEMENT ––


वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति अर्थात जुपिटर को गुरु की उपाधि प्राप्त है। संसार के स्मस्त प्राणियों में से बृहस्पति का प्रभाव सर्वाधिक रूप से मानव जीवन पड़ता है क्योंकि बृहस्पति ग्रह को भाग्य, धर्म, अध्ययन, ज्ञान विवेक, मोक्ष, दांपत्य में स्थिरता, यात्रा, क्रय-विक्रय, शयनकक्ष और अस्वस्थता व उपचार का कारक माना जाता है। बृहत पाराशर होरा शास्त्रनुसार बृहस्पति मानव जीवन में शैक्षणिक योग्‍यता, धार्मिक चिंतन, आध्‍यात्मिक ऊर्जा, नेतृत्‍व शक्ति, संतति, वंशवृद्धि, विरासत, परंपरा, आचार-व्‍यवहार, राजनैतिक योग्‍यता, सभ्‍यता, पद-प्रतिष्‍ठा, पैरोहित्‍य, ज्‍योतिष तंत्र-मंत्र एवं तपस्‍या में सिद्धि पर अपना आधिपत्य रखता है। शास्त्रों ने बृहस्पति ग्रह को हर तरह की आपदा-विपदाओं से धरती और मानव की रक्षा करने वाला ग्रह बताया है।


गृहस्थी में अपार सुख-शांति व समृद्धि के साथ जीवन के हर क्षेत्र में यश, सफलता व तरक्की चाहते हैं तो हर बृहस्पतिवार करें ये उपाय -


थोड़ी सी जलकुंभी लाएं उसे किसी नए पीले रंग के कपड़े में बांधकर घर के मंदिर में प्रणाम करवाकर रसोई में किसी भी स्थान पर लटका दें।इसके प्रभाव को सदा बनाए रखने के लिए प्रत्येक बृहस्पतिवार को जलकुंभी बदलते रहें।


जो जलकुंभी रसोई से उतारें उसे घर का कोई भी सदस्य किसी पवित्र नदी में बहा दें अथवा सुनसान जगह में जाकर दबा आए। अगर किसी बृहस्पतिवार को किसी कारणवश जलकुंभी न बदल पाएं तो उसे ही लगी रहने दें। आने वाले बृहस्पतिवार को बदल लें। 


जलकुंभी किसी भी तालाब से सरलता से मिल जाती है।