40 साल पहले जिस महिला को मरा समझकर गंगा में प्रवाह कर दिया था वह जिंदा घर लौट आई। शुक्रवार को कानपुर के बिधनू क्षेत्र के इनायतपुर गांव में हुए इस अजीबो-गरीब घटना को सुनकर सब हैरत में पड़ गए। बेटा-बेटी तक अवाक रह गए। पुरानी बातों और जन्मजात निशान देखकर बच्चों ने मां के दावे को सच मान लिया।

हालांकि मेडिकल साइंस इससे बहुत इत्तेफाक नहीं रखता है। डॉक्टर कहते हैं कि बेहोशी की हालत में नदी में प्रवाह करने पर बचने की संभावना काफी कम रहती है।

इनायतपुर गांव में विलासा देवी बहू बनकर आई थी। यहां के रहने वाले कल्लू रैदास ने दूसरी शादी कर उसे अपनाया था। कल्लू की भी मौत हो चुकी है। गांव के चेतराम के मुताबिक 40 साल पहले विलासा के बाएं हाथ में सांप ने डस लिया था। उस समय उसकी उम्र 39 साल थी।

ससुरालीजन उसे डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन शव जाजमऊ स्थित सिद्धनाथ घाट पर गंगा में प्रवाहित कर आए। शुक्रवार शाम इनायतपुर गांव में रहने वाले रामकुमारी और मुन्नीलाल के सामने 79 साल की वृद्धा ने पहुंचकर दावा किया मैं तुम्हारी मां हूं। वृद्धा ने कुछ गोपनीय बातें और जन्मजात निशान दिखाए तो बेटा-बेटी ने उनकी कही बातों को सच मान लिया। इंस्पेक्टर आशीष मिश्रा ने बताया विलासा की बातों से उसके परिजन संतुष्ट हैं।

गंगा से मल्लाहों ने बचाया

विलासा देवी के मुताबिक गंगा में प्रवाहित करने के बाद होश आया तो वह इलाहाबाद के किसी गांव में थी। वृद्धा के मुताबिक उसे मल्लाहों ने बचाया और अस्पताल ले गए। ठीक होने के बाद इलाहाबाद के ही मंदिर में आसरा तलाशा। तीन साल बाद उसे कन्नौज के सौरिक निवासी ठेकेदार रामसरन अपने घर ले गया और शादी कर ली। रामसरन की अब मौत हो चुकी है।

ऐसे याद आया परिवार

विलासा की बेटी रामकुमारी का ससुराल कन्नौज के धीरपुर चिरैया गांव में है। विलासा के मुताबिक गांव की सन्नो का मायका भी वहीं है। बातचीत के दौरान रामकुमारी का जिक्र आया तो उसके बारे में जानने को उत्सुकता हो गई। रामकुमारी से मिलने पर पुरानी यादें ताजा होती चली गईं और वह इनायतपुर गांव अपने परिवार के बीच आ पहुंची।

मेडिकली संभव नहीं है

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ विशाल गुप्ता के मुताबिक मेडिकली यह संभव नहीं है कि सांप के काटने के बाद मौत होने पर किसी की सांसे लौट आए। हो सकता है कि महिला को जिस सांप ने काटा हो वह न्यूरोटॉक्सिक हो।

इसमें जहर नस से दिमाग में पहुंचता है। इसलिए पहले बेहोशी आती है। अगर ज्यादा देर दवा न मिले तो बचना मुश्किल होता है। एक बार मृत घोषित करने के बाद किसी व्यक्ति में फिर जान आना संभव नहीं है। इस मामले में बताया जा रहा है कि उसे गंगा में प्रवाहित कर दिया गया था, इसमें तो मौत का खतरा और भी बढ़ जाता है। मेडिकली यह कहानी गले से नहीं उतर रही है।