हर घर की पसंद प्याज की तासीर लोगों की आंखों से आंसू निकालने की रही है. अक्सर देखा जाता है कि प्याज उपभोक्ताओं और उत्पादकों को रुलाती रहती है. इस बार भी ऐसा ही कुछ हुआ है. प्याज की कीमतें किसानों की आंखों में आंसू ला रही है.

नोटबंदी के बाद प्याज इतनी सस्ती हो गई है कि कीमत सुनते ही आप चौंक जाएंगे. हालत ये हो गए हैं कि हजारों क्विंटल प्याज को अब कोई भाव देने वाला नहीं मिल रहा है.

मध्यप्रदेश में हजारों उत्पादनकर्ता किसानों की आंखों से प्याज ने आंखू निकाल दिए हैं. दरअसल, राजस्थान की सीमा पर बसे प्रदेश के नीमच जिले की सबसे बड़ी मंडी में प्याज की कीमतें इस कदर गिरी हैं कि, किसान खून-पसीने से उत्पादित की गई उपज को सड़क पर फेंकने को मजबूर हैं.

व्यापारियों ने बताया कि मंडी में बंपर आवक के चलते एक किलो प्याज की रेट एक रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है. इससे ज्यादा दरों पर कोई भी आड़तिया किसानों से प्याज करने को राजी नहीं है.

नीमच के जावद, जीरन, मनासा के अलावा राजस्थान के निम्बाहेड़ा सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों से हजारों किसान टैक्टर-ट्रॉलियों में प्याज भरकर पहुंच रहे हैं. जहां काफी कम रेट लगाए जाने किसानों में निराशा का माहौल है.

नीमच के जावद, जीरन, मनासा के अलावा राजस्थान के निम्बाहेड़ा सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों से हजारों किसान टैक्टर-ट्रॉलियों में प्याज भरकर पहुंच रहे हैं. जहां काफी कम रेट लगाए जाने किसानों में निराशा का माहौल है.

मंडी में एक किलो प्याज का महज एक रुपए का भाव मिलने के कारण कई किसान अपनी उपज को मंडी में फेंक कर घर लौट गए.

किसानों की दुर्दशा पर प्रशासन ने चुप्पी साध ली है, जबकि व्यापारियों का कहना है कि

कि खपत नहीं होने से प्याज के दाम गिरे है. साथ ही उनका कहना है कि मंडी में अच्छी प्याज चार रुपए किलो तक बिकी है.