आपने ये कहावत नेकी कर दरिया में डाल की कहावत तो सुनी होगी, लेकिन नेकी की दीवार के बारे में आपने शायद ही सुना होगा. कोरबा शहर एक ऐसी दीवार भी है, जहां जरूरत का हर सामान बिना किसी कीमत के मिल जाता है.

यहां न तो कोई देने वाला होता और न ही किसी से पूछने की आवश्यकता. बस जिसकी जैसी जरूरत, वह वैसी चीज ले जाए. इस दीवार में उनका भी स्वागत होता है, जिनके घर पर रखे ऐसे सामान, जिनकी उन्हें तो जरूरत नहीं, पर किसी और के लिए कीमती हो सकता है, उसे वे स्वेच्छा से यहां छोड़ जाते हैं.

कोरबा के डीडीएम रोड पर सड़क के दाहिनी ओर स्थित नेकी की सोच के साथ स्थापित की गई नेकी की यह दीवार एक सप्ताह पहले ही अस्तित्व में आई. पृथ्वी सेवा मिशन के बैनर तले एकजुट हुए शहर के कुछ नेकदिल नागरिकों ने नेकी की यह दीवार बनाई है.

समाज के लिए कुछ बेहतर करने की मंशा लेकर उन्होंने पहले उस वर्ग को फोकस किया, जिनके पास घर-परिवार चलाने के साज-ओ-सामान की कमी नहीं. बल्कि घर पर जगह घेर रखे उन सामानों की अब उन्हें कोई जरूरत नहीं रही.

छोटा और तंग हो चली पुरानी कमीज-पतलून, गर्म कपड़े, पेन, कॉपी-पेंसिल, बच्चों के कंपास, स्कूल बैग, जूते-चप्पल, शॉल-चादर से लेकर टीवी और साइकिल तक सबकुछ इसमें शामिल है. अब घर पर इनकी जरूरत नहीं, ऐसे परिवारों को प्रोत्साहित किया और उन्हें जोड़कर उन्हीं से मिली पुरानी चीजों को नेकी की इस दीवार पर रख दी गई है, उनके लिए जिनके घर आज भी खाली हैं.

पृथ्वी सेवा मिशन के संस्थापक मनोज मिश्रा ने बताया कि इस मिशन के लिए रुपए-पैसे की जरूरत नहीं, केवल ज्यादा से ज्यादा लोगों का सहयोग अपेक्षित है. सभी से केवल यही निवेदन है कि वे अपने घर पर पड़ी उन चीजों को लाएं, जिनकी उन्हें कोई जरूरत नहीं. उनके लिए बेकार हो चुके वही सामान किसी दूसरे के लिए अनमोल साबित हो सकता है, यही उनका मूल उद्देश्य है.

पृथ्वी सेवा मिशन के संस्थापक बॉब का कहना है की कई बार लोग सहयोग देना चाहते हैं, लेकिन काम-काज की व्यस्तता में वे पहुंच नहीं पाते. इस मिशन की ओर से उनके लिए एक विकल्प भी है. अगर नेकी की दीवार तक सामान पहुंचाने का वक्त भी नहीं हो तो उनके घर जाकर कलेक्शन करने की सुविधा भी है. नेकी की दीवार पर लिखे नंबरों के जरिए संपर्क किया जा सकता है.

इस तरह बिना वक्त लगाए भी दूसरों की जरूरत पर काम आया जा सकता है और घर पर रखी चीजों का योगदान बिना मशक्कत दिया जा सकता है. आर्थिक मुश्किलों चलते सर्दी के मौसम में ठंड से बचने गर्म कपड़े की व्यवस्था नहीं कर पाए. उन्होंने बताया कि यहां छोड़ जाने वालों के कपड़े कई बार छोटे या बड़े हो जाते हैं.

ऐसे में वे कपड़े फिटिंग कराने टेलर का सहयोग भी प्रदान कर सकते हैं, जो नॉमिनल चार्ज लेकर उन्हें ठीक कर देंगे. इधर नेकी की दीवार से कपड़े लेने पहुची महिला ने संस्था की नेक काम को सराहनीय बताया, वही लोगो का कहना है कि इस दीवार से लोगो को मदद मिलेगी.