छत्तीसगढ़ का आदिवासी बाहुल्य बस्तर जहां विकास के सरकारी दावें तो काफी है. लेकिन जब ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं तब सरकारी दावों की खोखली हकीकत का पोल खुल जाती है. मामला एक नवजात की मौत का हैं. जो इलाज से पहले भी अपनी मां के आंचल के लिए तरस रही थी और अब मौत के बाद भी परिजनों की आस में उशका शव अपनों का इंतजार कर रहा है.

हफ्तेभर बीत जाने के बाद भी निर्मोही मां अब तक अपनी नवजात बच्ची का शव लेने नहीं पहुंची. बस्तर में आए दिन आ रही इस तरह की खबरों के पीछे आखिर वजह क्या हैं?

जगदलपुर के महारानी अस्पताल का ये मरचुरी रूम, जिसके आगोश में हर दिन जाने कितनी लाशें आती हैं. लेकिन कुछ दिनों से इस ये मरचुरी एक नवजात के शव को रखे हुए हैं. मरचुरी में रखे एक मासूम का शव पिछले एक हफ्ते से महारानी अस्पताल की मरचुरी में रखा हुआ हैं जिसे अपने परिजनों का इंतजार हैं. लेकिन अब तक परिजन मासूम के शव को लेने नहीं पहुंचे हैं.

दरअसल मामला बीते ग्यारह दिसम्बर का हैं. जब दंतेवाडा के भांसी में रहने वाले एक परिवार की प्रसूता ने एक नवजात बच्ची को जन्म दिया था. दो दिन की नवजात की हालत काफी खराब थी, एनिमिक और कमजोर होने के चलते भांसी से आए परिजनों ने नवजात को अस्पताल के नर्सरी वार्ड में छह दिसम्बर को भर्ती कराया था. जहां डाक्टरों की देखरेख में मासूम बच्ची का इलाज चल रहा था. लेकिन डाक्टरों के प्रयासों के बीच ग्यारह दिसम्बर को नवजात ने दम तोड़ दिया.

नवजात की मौत के बाद जब परिजनों को शव देने की बात आई तब पता चला कि परिजन नवजात को छोड़कर चले गए हैं. तब से परिजनों का कोई अता-पता नहीं हैं. जिसके बाद मेकाज चौकी प्रभारी एमजे सिंह ने परिजनों द्धवारा दर्ज कराए गए पते पर संबधित थाने को जानकारी भेज दी हैं. लेकिन अफसोस की नवजात के शव को मरचुरी मे पड़े हुए छह दिन बीत चुके हैं पर

परिजन अब तक पहुंचे नहीं हैं.

अपनों के इंतजार में मौत के हाथों मे जा चुकी मासूम के साथ परिजनों का ये व्यवहार हर किसी के लिए पीड़ादायक तो हैं ही, साथ ही ये सोचने पर मजबूर करता हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि दो दिन की नवजात को उसके हाल पर परिजन छोड़कर चले गए.

जानकारों की मानें तो बस्तर में इस तरह की तस्वीरें आए दिन दिखती है. दरअसल इसके पीछे गरीबी ही एक कारण हैं जिसके चलते परिजन नवजात को छोड़कर चल देते हैं. रेडक्रास सोसाईटी के सदस्य एलेक्जेडर के मुताबिक बसतर के कई इलाके ऐसे है जहां के गरीब परिजन नवजात का इलाज कराने महारानी अस्पताल लेकर आ जाते हैं.

गरीबी एक कारण हैं जो ममता पर भारी पड़ रही हैं. यही वजह है कि मां की ममता गरीबी के आगे लाचार हो जाती है और उसे इस तरह का कदम उठाना पड़ता है.