लखनऊ: आक्रामक हाकी का नायाब नमूना पेश करते हुए भारत ने पेनल्टी शूटआउट में आस्ट्रेलिया को 4.2 से हराकर 15 साल बाद जूनियर विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया जहां उसका सामना बेल्जियम से होगा। खचाखच भरे मेजर ध्यानचंद स्टेडियम पर जैसे ही भारत के लिये मनप्रीत सिंह जूनियर ने चौथी पेनल्टी को गोल में बदला, दर्शकों में मानो जोश का तूफान उमड़ पड़ा । मैदान पर चारों आेर तिरंगे लहराते दिखाई देने लगे और पूरा स्टेडियम ‘चक दे इंडिया’ से गुंजायमान हो गया। पिछले 11 बरस से जूनियर हाकी में कांस्य पदक का मुकाबला हारने की टीस से जूझ रहे कोच हरेंद्र सिंह ने मैदान को प्रणाम किया और खिलाड़ी आंखों मे आंसू लेकर एक दूसरे के गले लग गए।   

पेनल्टी शूट आउट में भारत के लिये कप्तान हरजीत सिंह ने 21वें मिनट में रिबाउंड पर पहला गोल किया जबकि ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह और सुमित ने बाकी दो गोल दागे । आखिरी गोल मनप्रीत ने किया। वहीं आस्ट्रेलिया के लिये ब्लैक गोवर्स और जैक वेल्श ने गोल किये जबकि मैथ्यू बर्ड और लाशलान शार्प के निशाने चूक गए। इससे पहले निर्धारित समय तक स्कोर 2.2 से बराबर था । भारत के लिये गुरजंत सिंह (42वां) और मनदीप सिंह (48वां मिनट) ने गोल किये जबकि आस्ट्रेलिया के लिये टाम क्रेग (14वां मिनट) और शार्प (57वां) ने गोल दागे।  

भारत तीसरी बार पहुंचा फाइनल में 
भारत तीसरी बार जूनियर विश्व कप हाकी के फाइनल में पहुंचा है। सबसे पहले 1997 में इंग्लैंड के मिल्टन केनेस में हुए फाइनल में उसे आस्ट्रेलिया ने 3.2 से हराया था। इसके चार साल बाद आस्ट्रेलिया के होबर्ट में भारत ने अर्जेंटीना को 6.1 से हराकर एकमात्र खिताब जीता। रोटरडम में 2005 जूनियर हाकी विश्व कप के कांस्य पदक के मुकाबले मे स्पेन ने भारत को हराया था । वहीं बेल्जियम पहली बार इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचा है। मैच में पहले हाफ में भारतीयों ने गोल करने के कई आसान मौके गंवाये । क्वार्टर फाइनल में 55वें मिनट तक स्पेन से एक गोल से पिछडऩे वाली भारतीय टीम ने बाद में उसी अंदाज में वापसी करते हुए दो गोल दागे। पहले हाफ में गेंद पर नियंत्रण के मामले में मेजबान का पलड़ा भारी रहा लेकिन सर्कल के भीतर फारवर्ड पंक्ति ने चूक की। 

भारत को सबसे पहले गोल करने का मौका 12वें मिनट में मिला लेकिन गुरजंत सिंह से मिले पास को परविंदर सिंह सर्कल के भीतर पकड़ नहीं सके। दूसरी आेर आस्ट्रेलिया ने भी हमले तेज कर दिये जिसका फायदा 13वें मिनट में पेनल्टी कार्नर के रूप में मिला । इस पर पहले शाट में गोल नहीं हो सका और रिबाउंड पर भी निशाना चूक गया लकिन दूसरे रिबाउंड पर टाम क्रेग ने गेंद को गोल के भीतर डाल दिया। भारत को पहले पेनल्टी कार्नर के लिये 27वें मिनट तक इंतजार करना पड़ा। एक ही मिनट में भारत को दो पेनल्टी कार्नर मिले और दूसरे पर हरमनप्रीत सिंह के शाट पर गेंद आस्ट्रेलियाई गोलकीपर थामस एशले की स्टिक से टकराकर गोलपोस्ट के उपर से निकल गई।