दर्पण किसी भी घर में खास भूमिका निभाता है। इसमें न केवल अपनी सुंदरता निहारी जाती है बल्कि ये आपका भूत, भविष्य और वर्तमान भी तय करता है। 


* हर व्यक्ति का स्वप्न होता है एक आशियाना बनाना। भवन बनाने के साथ मकान में वास्तु दोष निवारण के लिए मंत्रों का उपयोग बखूबी होता है। उसी तरह अष्टकोणीय दर्पण मकान के बाहर, आसपास, वास्तु दोष का शमन करता है।


* आपके मकान में यदि तीन दरवाजे एक सीध में हों तो यह धन की हानि का कारण है। ऐसे में अष्टकोणीय दर्पण का उपयोग करना लाभकारी रहता है।


* मकान के प्रवेश द्वार के सामने वृक्ष का होना अशुभ है। ऐसे में मकान मालिक अनचाही परेशानियों से घिरा रहता है। इस समस्या से निपटने के लिए अष्टकोणीय दर्पण का उपयोग करें।


* मकान मुख्य सड़क के किनारे है या मकान के तीनों ओर सड़क है तो यह अशुभ है और अष्टकोणीय दर्पण का उपयोग करना चाहिए।


* मकान के पास में या आगे, पीछे, सामने श्मशान, कब्रिस्तान, सूखे व कांटेदार वृक्ष हों तो यह अशुभ है। इससे मकान में रहने वाला परेशान रहता है। परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए अष्टकोणीय दर्पण का उपयोग किया जाना चाहिए।


*  उत्तर या पूर्व की दीवार पर उत्तर पूर्व की ओर लगे दर्पण लाभदायक होते हैं। 


* दर्पण के फ्रेम पर या दर्पण की पीछे लाल, सिंदूरी या महरून रंग नहीं होना चाहिए। 


* दर्पण जितना हल्का तथा बड़े आकार का होगा उतना ही लाभदायक होगा। व्यापार तेजी से चल पड़ेगा तथा कर्ज खत्म हो जाएगा। 


* दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर लगे दर्पण हानिकारक होते हैं। दक्षिणी पश्चिम, पश्चिमी-उत्तरी या मध्य भाग का चमकीला फर्श या दर्पण गहराई दर्शाता है, जो धन के विनाश का सूचक है। फर्श पर मोटी दरी, कालीन आदि बिछा कर ऋण व दिवालिएपन से बचा जा सकता है।

 

* पश्चिमी-दक्षिणी भाग में फर्श पर उल्टा दर्पण रखने पर फर्श ऊंचा उठ जाता है। फलत: ऋण उतर जाता है। उत्तर व पूर्व की ओर उल्टे दर्पण भूल कर भी न लगाएं, अन्यथा ऋण बढ़ता जाएगा। गलत दिशा में लगे दर्पण जबरदस्त वास्तुदोष के कारक  होते हैं, अत: इस दिशा में कोई दर्पण न लगाएं और लगा हो तो हटा लें।


*  बाहरी प्रदूषण, टोने-टोटकों, विभिन्न प्रकार के विघ्नों व वास्तुदोष से बचाव के लिए घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक, गणेश, पाकुआ मिरर (अष्टकोणीय आईना) लगाएं।