अंकशास्त्र के अनुसार अंक "8" शनि का प्रतीक है। आठ का संयोग अष्टमी तिथि, देवकी की आठवीं संतान, आठ पत्नियां, आठवां मुहूर्त। नक्षत्र सारिणी में शनि ही आठवें नक्षत्र पुष्य के स्वामी हैं। नक्षत्र सारिणी के अनुसार कृष्ण चौथे नक्षत्र रोहिणी के अर्ध चंद्रमा के साथ पैदा हुए थे अर्थात 8/2 = 4 यहां भी अंक आठ का फेरा है। शास्त्रों में वर्णित है की शनिदेव कृष्ण जन्म से हजारों वर्ष पूर्व से ही कृष्ण भक्ति में विलीन थे।


शास्त्रानुसार शनिदेव श्रीकृष्ण के परम भक्त हैं। पौराणिक कथा के अनुसार उन्होंने कृष्ण दर्शन हेतु घोर तप किया। तब कृष्ण ने मथुरा के पास कोकिला वन में प्रकट होकर आशीर्वाद दिया कि शनि भक्ति करने वाला हर व्यक्ति दरिद्रता, पीड़ा व संकट से मुक्त रहेगा। शनि की कृष्ण भक्ति सार्थक कर्म, बोल व विचारों की राह पर चलने का संदेश देती है। अच्छे-बुरे कर्म व विचार पर ही शनि दण्ड नियत करते हैं। 


इसी कारण शनि की प्रसन्नता हेतु शनिवार पर गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी के विशेष दिन व्यक्ति का भाग्योदय हो सकता है तथा व्यक्ति की दरिद्रता, पीड़ा व संकट दूर होंगे। 

* नहाने के पानी में काले तिल डालकर स्नान करें। 

* पीले वस्त्र पहनें।

* श्रीकृष्ण की काली प्रतिमा को दूध से फिर पानी से स्नान करवाएं।

* श्रीकृष्ण को केसर मिले या पीले चंदन, पीले फूल, तुलसी दल चढ़ाने के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं। 

* चंदन धूप व गाय के घी का दीप जलाएं। 

* तुलसी की माला से 5 माला श्रीकृष्ण मंत्र का जाप करें। 

मंत्र: ॐ श्रीं श्रीधराय त्रैलोक्यमोहनाय नम:

* जाप पश्चात श्री कृष्ण की आरती करें।